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Thursday, July 9, 2020

117:-बीबी की मनमानी।

बीबी करती है मन मानी
नही बनाती है खानापानी।

कहती है की घूमने ले चलो
पार्क की सैर कराने ले चलो।

कैसे उसे अब समझाऊ मैं
कोरोना का डर दिखाऊ मैं।

कहती नई साड़ी दिलाओ
मैचिंग की मास्क ले आओ।

करती घर में वो है मनमानी
नही बनाती है खाना पानी।

उसे नही किसी का भी डर है
न कोरोना का कोई भय है।

उसे तो चाहिए शॉपिंग करना
कॉस्मेटिक्स का है ढेर करना।

बहुत बड़ी घर में विपदा आयी
बीबी आज ही  जिद पर आई।

कहती कोरोना से नही मैं डरती
जैसे तुमपे बेलन से वार करती।

वैसे ही कोरोना भी मैं लड़ लुंगी
उसे भी मैं घर से बाहर कर दूंगी।

बहुत बड़ी आयी घर में परेशानी
बीबी करती घर में ही मनमानी।

अविनाश सिंह
8010017450

113:-पति पत्नी संवाद।

पति के संग हुआ बीवी का बवाल
बीबी ने दाग दिए  अनेको सवाल

करते नही  हो  तुम एक भी  काम
लगे रहते हो फ़ोन में सुबह से शाम

ऐसी क्या आफत आयी है फ़ोन में
जो लगे रहते तुम फ़ोन से सोने में

पति बेचारा शांत हो धीरे  से बोला
तुम्हारे पापा संग मैं पब्जी है खेला

बीवी को ये सुन और  गुस्सा आया
बिन कहे पति की और दौड़ लगाया

नही बनाऊंगी खाना देख लेना तुम
भूखे ही सो जाओगे  सुन लेना तुम

बेचारे पति को लगा डर लगा मनाने
शॉपिंग का लालच दे लगा बहलाने

बिन परमिशन नही  उठाऊंगा फ़ोन
कोई लड़े या कोई कर ले टेलीफोन

बस तुम्हारी  ही मैं अब बात सुनूंगा
नही किसी केसंग मैं पब्जी खेलूंगा

अविनाश सिंह
8010017450

100:-शादी में आने के नियम।

हमारे  बेटे की शादी  में आपको  आना है
पर हा अकेले ही, बच्चों को नही लाना है।

गिफ्ट नही लाना पर मास्क जरूर लगाना
और क्रीम की जगह सैनिटाइजर लगाना।

लिफाफा देने  की सुविधा खत्म कर दी हैं
फ़ोन पे,पेटीम जैसी सुविधा दे दी गयी हैं।

भूल कर भी किसी  बड़ो का पैर मत छूना 
वर-वधुर को दूर से  ही आशीर्वाद हैं देना।

आरोग्य  सेतु ऐप पहले से इंसटाल रखना
एक मीटर की दूरी सबसे ही मेंटेन करना।

हर पग पर होगी सैनिटाइजर की व्यवस्था
भूल कर शेक  समझ  उसे  पी नही लेना।

सेल्फी लेना हो अगर तो स्वयं ही ले लेना
किसी और को अपना फ़ोन तुम मत देना।

गले मिलना,हाथ मिलाना होगा एक जुर्म
नही मिलेगा खाने को पनीर या मशरूम।

नास्ता पानी,खाने का  होगा विशेष प्रबंध
नही रखना तुम रिश्तदारों से कोई संबंध।

शादी में होगी सिर्फ  तुम्हारी ही  एक एंट्री
नही होगी ड्राइवर आदि की कोई भी एंट्री।

पैकिंग की सुविधा होगी  पूर्ण रूप से बन्द
नही करना कोशिश तुम कोई ऐसा प्रबंध।

विदाई में मास्क सैनिटाइजर दिया जाएगा
कोरोना से बचाव का संदेश दिया जाएगा।

अविनाश सिंह
8010017450

Wednesday, July 8, 2020

35:-ईद आया।

ईद आया ईद आया,रमजान के बाद देखो ईद आया
खुशियाँ लाया सौहार्द लाया, देखो भाई ईद आया।

भाईचारे की बात करेंगे सबको हम आज लगाएंगे
तन से और मन से आज हम सबका स्वागत करेंगे।

एक बनेंगे नेक बनेंगे, सबको हम सेवई खिलाएंगे
नाचे गाएंगे धूम मचाएंगे,मिलकर हम ईद मनाएंगे।

हम तुम्हारे तुम हमारे ये रिश्ता अब हम निभाएंगे
देकर साथ जन्म जन्म का ये वादा हम निभाएंगे।

चाँदनी रात में  चाँद खिलेंगे, घर-घर मे ईद मनेंगे
खुशियों के फूल खिलेंगे, घरो में आज ईद मनेंगे।

रोजे रखकर हुई इबादत, खुशियां हर घर है आयी
हिन्दू मुस्लिम सिख, ईसाई सभी मनाएंगे ईद भाई।

आओ सब मिलकर खुशी बाँटे पावन से इस पर्व पर
गले लगाएं सभी अपनो को ईद के शुभ अवसर पर।

अविनाश सिंह
8010017450

26:-प्रेम की डोर।

हा जनता हूँ तुम प्यार बहुत करती हो,
दिलो पे कुछ बात है जिसे तुम छिपाती हो।

छुपाती हो गमो को, मेरा इंतेजार बहुत करती हो,
हर घड़ी हर पल मेरा ही साथ देती हो,

चाहा था तुमसे एक रिश्ते को जोड़ना,
हर पल का साथ कभी न छोड़ना

प्यार सबका झूठा था तेरा प्यार अनोखा था,
सबका दुख पराया था मेंरा दुख तेरा अपना था।

सब ने मुझे सताया मुझे सताया था तूने मुझे अपनाया था,
सब ने पैसे को प्यार किया और तूने मुझे प्यार दिया ।

सबका मैंने ऐतबार किया और तूने मेरा दीदार किया,
सब ने मुझे रुलाया था और तूने मुझे हँसाया था, 

वक्त ने सब कुछ बदल दिया और तूने वक्त को ही बदल दिया
फिर भी मैंने सबको माफ़ कर दिया,और मैंने तुझे "अपना" कह दिया।

अविनाश सिंह
8010017450

25:-भले मेरे पास


मैं रहूँ या ना रहूं भले तेरे पास ।

मेरी यादे रहेंगी हर वक़्त तेरे साथ।

मेरी कमी तुझे खलेगी, 
मेरी बाते हर पल तुझे याद रहेगी।

मैं कहता रह गया हर वक़्त एक बात,
तू दे-दे न मुझे जीवन भर का साथ।

मेरी बातें तुझे सताएगी,
चाह के भी तू मुझे न अब सुन पाएगी।

छोड़ जाऊंगा मैं हमेशा का साथ,
तू हो जाएगी मेरे बिन एक सुना सा ख्वाब।

अकेले में बस तुझे आँसू ही आएंगे,
चुप कराने को मेरे हाथ तुझसे दूर हो जाएंगे।

तेरी मंजिल भी होगी,तेरे सपने भी होंगे,
पर हर मोड़ पे मेरे जैसे तेरे अपने न होंगे।

हर बीते पल को देख तुझे दुख सा होगा,
सब कुछ होगा पर मेरा साथ न होगा।

कामयाबी के हर परचम को तू पाएगी,
मेरे बिन इन कामयाबी को तू किसे दिखलाएगी।

रह पायगी तू बिन मेरे बस मुझे इतना बता दे,
क्या भूल जायेगी उन बीते पल को बस इतना बता दे

24:-हाथ धोने चला था।

मैं इश्क़ के समुंदर में यू हाथ धोने चला था,
अंत तो नही बस गहराई को नापने चला था।

मिले कही शूल तो कही पत्थरों के ठोकर,
बिन भिगाये पैर मैं समुन्द्र को पार करने चला था।

नादान था मैं इन लहरों की तेज धाराओं से,
बिन सोचे समझे मैं कदम आगे को बढ़ाने चला था।

ना सोंचा न समझा ये तेज हवाओं के रुख को,
बिन सोचें मैं इश्क़ के समुन्द्र में डूबने को चला था।

सुना था धाराएं कभी अनुकूल तो कभी प्रतिकूल होती,
पर इश्क़ में मेरे ये धाराएं हर वक़्त प्रतिकूल को चला था।

अविनाश सिंह
8010017450

23:-भारत माँ के सपूत

भारत माँ के सपूतोंं का तुम क्या बिगाड़ पाऔगे,
हम खून की नदिया बहायेंगे तुम सिर्फ चिल्लाओगे।

काश्मीर हमारा है तुम क्या ले पाऔगे,
तुम चिल्लाते चिल्लाते अपना ही घर जलाओगे।

तुम एक मरोगे हम हजार मारेंगे, 
तुम क्या अमरनाथ की यात्रा रोक पाऔगे।

कश्मीर हमारा है हम लेकर दिखाएंगे,
हर हर बोले का नारा हर एक घर मे लगवाएंगे।

हिम्मत है तो आगे से आके देखो तुम्हारी औकात दिखा देंगे,
भारत माँ के सपूतो का जजबा दिखा देंगे।

डरते नही है हम किसी के बाप से,
जला देंगे हम तुम्हे तेरे ही आग से।

भारत माँ के सपूतो का तुम क्या उखाड़ पाऔगे,
अपनी चुतपुटीआ बन्दूकों से तुम हमे क्या डरा पाऔगे।

अविनाश सिंह
8010017450

22:-बनना चाहता हूं।

मैं इश्क़ में भी इंसान बनना चाहता हूं
करके कुछ अच्छे काम मैं महान बनाना चाहता हूं।

हांं मैं कुछ नेक काम करना चाहता हूं,
औरो को नही मैं खुद को बदलना चाहता हूं।

ना धन की चाहत है न दौलत की चाहत है,
पाकर इन्हें मैं गरीबोंं के बस नाम करना चाहता हूं।

माँ के बुढ़ापे का मैं सहारा बनाना चाहता हूं,
तो पिता के जीवन का सहारा बनाना चाहता हूं।

ना नौकरी की आश है न महल की चाह है,
खुद को जल के भी औरों के लिए छाव बनाना चाहता हूं।

मैं बिन बेटोंं के माँ का बेटा बनाना चाहता हूं,
उनके चहरे पे हँसी का एक हिस्सा बनना चाहता हूं।

समाज मे फ़ैली कुरीतियों को दूर करना चाहता हूं,
तो अपनी कविता के माध्यम से यही संदेश देना चाहता हूं।

अविनाश सिंह
8010017450

21:-जीवन नही मरा करता।

दिल को मेरे तोड़ के जाने वाले,
मेरे आँशुओ की कद्र न करने वाले,
संसार मे सुख का जीवन जीने वाले,
कुछ आँशु के गिर जाने से जीवन नही मरा करता।

बिन समझे मुझे नीचा दिखाने वाले,
मेरे में ही गलतियो को निकालने वाले,
हर बात में मुझे औकात दिखाने वाले,
मेरी खिलिया मेरा मजाक बनाने वाले,
मेरे में कमी ढूंढने से मेरे में कमी नही आया करता।

हर रोज मुझे को तोड़ के जाने वाले,
खुद को सही साबित करने वाले,
अपनी गलतिया मुझपे थोपने वाले,
अपनी ही बात को सिद्ध करने वाले,
बिन रोये ये आँशु आंखों से युही नही निकला करता।

अविनाश सिंह
8010017450

Tuesday, July 7, 2020

20:-मैं रहूँ या ना रहूँ।

रहूं या ना रहूं भले तेरे पास, 
मेरी यादे रहेंगी हर वक़्त तेरे साथ।

मेरी कमी तुझे खलेगी, 
मेरी बाते हर पल तुझे याद रहेगी।

मैं कहता रह गया हर वक़्त एक बात, 
तू दे-दे न मुझे जीवन भर का साथ। 

मेरी बातें तुझे सताएगी, 
चाह के भी तू मुझे न अब सुन पाएगी। 

छोड़ जाऊंगा मैं हमेसा का साथ, 
तू हो जाएगी मेरे बिन एक सुना सा ख्वाब। 

अकेले में बस तुझे आँशु ही आएंगे, 
चुप कराने को मेरे हाथ तुझसे दूर हो जाएंगे। 

तेरी मंजिल भी होगी,तेरे सपने भी होंगे, 
पर हर मोड़ पे मेरे जैसे तेरे अपने न होंगे।

हर बीते पल को देख तुझे दुख सा होगा, 
सब कुछ होगा पर मेरा साथ न होगा। 

कामयाबी के हर परचम को तू पाएगी, 
मेरे बिन इन कामयाबी को तू किसे दिखलाएगी। 

रह पायगी तू बिन मेरे बस मुझे इतना बता दे, 
क्या भूल जायेगी उन बीते पल को बस इतना बता दे

अविनाश सिंह
8010017450

19:-मुक्तत प्रेम।

चाहा जिसे दिल से उसनें विश्वाशघात किया,
सामने से हमे प्यार किया पीछे से वार किया।

अपने गुनाहों को कुबूल कर बैठे है हम,
इश्क़ में इस कदर मशगूल हो बैठे है हम,

उनकी मोह्हबत में न जाने कैसा जादू है,
देख उन्हें सारे-दुख दर्द भूल बैठे है हम।

अब लबों पे बस उनका ही नाम रहता है,
याद कर उन्हें सारे मिसरे भूल बैठे हैं हम।

कैसे बया करे अपने इश्क़ के इस हाल को,
मिलने तो गए पर पता ही भूल बैठे हैं हम।

यादो के हर पल मैं उन्हें ही संजोया है हमने,
इश्क़ तो कर बैठे पर बताना ही भूल बैठे हैं हम।

अविनाश सिंह
8010017450

18:-दिल की बात

ये दिल तो बहुत कुछ कहता है,
उसके लिए ही हर पल रहता है।

ना जाने क्यों बातो को छुपता है,
देख उसे यू चुप सा हो जाता है।

कह नही पाता कोई सा भी बात,
सह लेता है हर वो एक जज्बात।

उसकी मजबूरी को भी समझता,
इसलिए तो कुछ भी नही कहता

कब तक खुद को युही समझाये,
खुद को ही गलत हर बार बनाये।

ना चाहो फिर भी वही याद आये,
फिर देख उसे दिल क्यो घबराये।

ये दिल तो बहुत  कुछ कहता है,
कभी हँसता तो कभी रोता भी है

अविनाश सिंह
8010017450


17:-खत्म हो रहा।

आज बात खत्म हो रहा
कल साथ खत्म हो जाएगा
युही बेवजह जगते-जगते
ये रात भी खत्म हो जायेगा।
वो किये वादे खत्म हो रहे
जो दिए वादे खत्म हो रहे
जो हँसते थे बातों को सुन के
वो आज किनारा कस रहे है।
जिसके लिए हमने दुआ माँगा
वो हमे अब बददुआ दे रहे है
खुद को सही साबित करने मे
वो रात की नींद को बेच रहे।
जिसे चाहा था हमने दिल से
वो हमसे दूर होते जा रहे है
कैसे रोके उन्हें हम जाने से वो 
नफ़रत की बीज बोते जा रहे।
सच बोलता हूं न मैं इसलिए 
हर वक़्त बदनाम हो जाता हूं
अच्छा करने की चाहत में मैं
सौ बात बर्दाश कर जाता हूं।
दिल मे छुपी दर्द की बात को
कैसे बया करू मैं जज्बात को
दर्द में भी हँसना मै सिख रहा
खामोश रहना मैं अब सिख रहा।

16:-माँ मैं जा रहा हूं।

आज मैं जा रहा हूँ माँ,
अपनो से दूर दूसरी दुनिया में जा रहा हूँ माँ,
वहाँ अपना कोई यार नही अपना कोई प्यार नही,
आने की इतनी खुशी थी फिर जाने का इतना गम क्यो माँ।

छुट्टियां तो मानो पल भर में बीत गए,
हर एक दिन हँसी खुशी में बीत,
अब जाने का पल आ गया ना माँ,
अपनो से दूर जाने का गम सत्ता रहा है माँ।

वहाँ आपके हाथ की रोटियांको खिलाएगा माँ,
वहाँ कौन सुबह से शाम तक डाट गा माँ।,
मेरी गलतियों पे कौन समझायेगा माँ।

तेरे आँचल में वो सुख कहा से पाऊंगा माँ,
अपने लाडले बड़े भाई का प्यार कहाँ से पाऊंगा माँ,
पापा की डांट कौन सुनायेगा माँ,
अपनो सा प्यार कौन दिखाएगा माँ।

भैया दीदी का प्यार मैं कहाँ से लाऊंगा 
उनके जैसा साथी मैं वहाँ कहाँ से पाउँगा,
आपके काम मे अब हाथ कौन बटाएगा माँ,
आप मेरे बिना कैसे रह पाएंगी माँ।

आपका लाडला बेटा आज जा रहा मैं माँ,
अपने हर गमो को अपने दिल मे छुपा रहा है माँ।
घर की नन्ही सी यादे लेके जा रहा हु माँ,
इन्ही यादो के सहारे मैं अपना समय काट लूँगा माँ।

15:-दूरी ना हो

बाहों में भर लो मुझसे कोई दूरी ना हो,
भले मजबूरी हो फिर भी कोई दूरी न हो,
यू तो बहुत है तुम्हे पलकों पे बैठाने वाले,
संग जीने के लिए एक रात की भी दूरी न हो।

लोग कहते है दूर रहने से प्यार बढ़ता है,
और पास आने से तकरार बढ़ता है,
हम क्या बताये अपने रिश्ते को जनाब,
ये पास हो या दूर ये निरंतर ही बढ़ता है।

तुझसे लिपट के सारे दुख भूल जाता हूं मैं,
न चाहते हुए भी तुझसे लिपट ही जाता हूं मैं,
कैसे बताऊ तुझ बिन रात कैसे काटता हु,
तुझसे बात करने के खातिर रात भर जागता हु मै।

तू थोड़ा कदम बढ़ा मैं रास्ता भी खोज लूंगा,
तू साथ दे तो थोड़ा मै पत्थरों से भी लड़ लूंगा,
न सोच क्या कहेगा क्या सोचेगा जमाना,
तू थोड़ा हस तो सही मैं चाँद भी तोड़ लाऊँगा।

बस साथ चाहिए मैं बहुत कुछ हासिल कर लूंगा,
खुद नीचे सो के भी मैं तुझे पलकों पे सुला लूंगा,
तेरी खुशी के लिए मैंने बहुत कुछ सहा है,
तेरे हसी के खातिर यदि काटो पे चलना रहा तो मैं 
खुशी से चल लूंगा।

मैं अच्छा लिखता या खराब लिखता हु,
नही पता मुझे मैं क्या लिखता हु,
हा इतना सच तो जरूर है ये ,
मैं सच की नोख पे सच को लिखता हूं।

14:-बहुत याद आता है

बहुत याद आता है
तुझसे बाते करना तुम्हे याद करना,
बिन देखे तुझसे तूझमे ही जीना,
कभी साथ चलना तो कभीं आगे चलना,
तेरा दूर से मुझे देखना,
पास आगे वो तेरा पकड़ के रोना।

बहुत याद आता है,
मुझे खुद की बाहों में भरना,
मेरे में हर पल जीना मुझमे ही मरना,
मेरी आँखों में आंखे डाल मुझे देखना,
तो मुझे धीरे से माथे पे किस कर जाना।

बहुत याद आता है,
मेरे हाथों मे अपना हाथ रखना,
मुझे खुद की बाहों में समेटना,
मुझे खुद को पास बुलाना,
पास बुला के दूर जाना.,
बहुत याद आता है।

साथ बिता वो हर पल, 
बहुत याद आता है
साथ मे घूमना और साथ मे मस्ती,
हर रोज तेरी याद दिलाता है,
बहुत याद आता है।

बस एक बात हमेशा से रही,
तुझसे जादा तेरी इज्जत प्यारी रही,
तुम्हे कभी लड़की समझ गलत न किया,
तुमने खुद को मेरे हवाले किया,
मैंने तुम्हरा उस पल भी सम्मान किया,

क्योकि मैंने कभी तुम्हरे तन से प्यार नही किया,
तुम्हे बहुत माना तुम्हरा हमेशा से सम्मान किया,
बस वो पल याद आने लगे थे,
हम तुम्हे याद करने लगे थे,
खुद में तुम्हे पाने लगे थे।

सोचा वो कंधा आज भी मिल जाता,
उसे पकड़ मैं भी थोड़ा याद कर लेता,
 मैं आज भी तुम्हे बहुत प्यार करता हूं,
तुम्हारा सम्मान मैं आज भी उतना ही करता हूं।

13:-मेरा क्या होगा।

जो तू न होगी तो मेरा क्या होगा,
जिंदगी में बस अंधेरा ही होगा।,
न सुबह होगी न मेरा शाम होगा
जिंदगी का कोई न मुकाम होगा।

रास्ते होंगे पर उसपे चलना न होगा
अब मेरा कोई भी अपना न होगा,
जो तू न होगी तो मेरा क्या होगा,
जिंदगी में बस अंधेरा ही होगा।,

बिन तेरे अब कोई वजूद न होगा,
सब बेकार होगा कुछ नया न होगा
जो तू न होगी तो मेरा क्या होगा,
जिंदगी में बस अंधेरा ही होगा।

बगिया में अब कोई फूल न होगा,
अब जिंदगी में बस शूल ही होगा,
जो तू न होगी तो मेरा क्या होगा,
जिंदगी में बस अंधेरा ही होगा।

आँखों मे बस अब आशु ही होगा,
हर वक़्त बस तेरा ही नाम होगा,
जो तू न होगी तो मेरा क्या होगा,
जिंदगी में बस अंधेरा ही होगा।

अविनाश सिंह
8010017450

12:-हास्य कविता


मैं करेले जैसा कड़वा सा,तुम गोभी के जैसी स्वीट सी,
मैं भिंडी के जैसे बेशवाद सा,तम्हे पनीर की टेस्ट प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं मोदी योगी सा कम्युनल,तुम जयललिता की शान सी,
मैं माल गाड़ी के डिब्बे सा तुम राजधानी की ट्रेन प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय, असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं गाँव की सड़कों सा,तुम शहर की नॉनस्टॉप एक्सप्रेस्वे सी,
मैं कुर्ता पैजामा के दीवाने सा,तुम्हे लिवाइस की जीन्स प्रिय
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं मंगल के बाजार सा,तुम नेहरू प्लेस जैसे चकाचोंध सी,
मैं जनरल के डिब्बो सा,तुम्हे एसी कोच के सीट प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं नोकिया ब्लैकन वाइट सा,तुम ईफ़ोन के कलरफुल सी,
मैं लतामंगेशकर के गाने सा,तुम हनी सिंह की दीवानी प्रिय
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं नोएडा के आलू पराठे सा,तुम जीआईपी माल के बर्गर सी,
मैं दर्री के जैसा कठोर सा,तुम्हे स्लीपवैल के जैसे गद्दे प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं गाँव के देशी लड़कों सा,तुम शहर के कटरीना कैफ सी,
मैं मोबाइल पे डांस करने सा,तुम्हे हौज़ खाज़ का बार प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं टेलीनॉर के 2जी नेटवर्क सा,तुम ऐयरटेल के 4जी डोंगल सी,
मैं हनुमान के भक्त सा,तुम सलमान खान की दीवानी प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं नैनो की रफ्तार सा,तुम ऑडी की कार सी,
मै सिनेमा के दीवाने सा,तुम्हे वेवसिटी के पीवियार प्रिय
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

अविनाश सिंह
8010017450

11:-इंसान बनना चाहता।

मैं इश्क़ में भी इंसान बनना चाहता हूं,
करके कुछ अच्छे काम मैं महान बनाना चाहता हूं।

हा मैं कुछ नेक काम करना चाहता हूं,
औरो को नही मैं खुद को बदलना चाहता हूं।

ना धन की चाहत है न दौलत की चाहत है,
पाके इन्हें मैं गरीबो के बस नाम करना चाहता हूं।

माँ के बुढ़ापे का मैं सहारा बनाना चाहता हूं,
तो पिता के जीवन का सहारा बनाना चाहता हूं।

ना नौकरी की आश है न महल की चाह है,
खुद को जल के भी औरों के लिए छाव बनाना चाहता हूं।

मैं बिन बेटे के माँ का बेटा बनाना चाहता हूं,
उनके चहरे पे हस्सी का एक हिस्सा बनना चाहता हूं।

समाज मे फ़ैली कुरीतियों को दूर करना चाहता हूं,
तो अपनी कविता के माध्यम से यही संदेश देना चाहता हूं।

अविनाश सिंह
8010017450

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235:-कविता

 जब भी सोया तब खोया हूं अब जग के कुछ  पाना है युही रातों को देखे जो सपने जग कर अब पूरा करना है कैसे आये नींद मुझे अबकी ऊंचे जो मेरे सभी सपने...

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