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Friday, August 7, 2020

229:-आलेख।

रोड तो हो रहे है चौड़े पर सिकुड़ रही है लोगों की जिंदगी।

यह बात सभी को अच्छे से पता हैं की पेड़ पौधे हमारे जीवन के लिए कितने महत्वपूर्ण होते हैं,हमें यह जीने के लिए ऑक्सीजन देते है खाने के लिए फल फूल, ईंधन के लिए लकड़ी और बहुत से लड़की से निर्मित सामान। और हम उन पेड़ पौधों को क्या देते है क्या कभी किसी ने सोचा? उसके थोड़ा से बड़े होते ही हम स्वार्थी बन जाते है उसमें एक बाल्टी पानी तक नही डालते है,फिर भी पेड़ हमसे कोई शिकायत नही रखते हैं वह हमें नियमित उपयोगी वस्तु देते रहते हैं किन्तु लोगों की इच्छा और लालच इतनी बढ़ गयी है की लोगों ने पेडों की अंधाधुंध कटान शुरू कर दिया हैं।

एक दिन में न जाने कितने जंगल और बाग साफ हो जा रहे है आज सबसे अधिक कटान होने का कारण हैं रोड आदि का चौड़ीकरण,रोड नाले आदि के निर्माण कार्य हेतु पेड़ो को  काट कर गिराया जा रहा है जिससे रोड तो चौड़े हो रहे है पर लोगों की जिंदगी सिकुड़ रही है वह खुल कर साँस नही ले पा रहे है,रोड के इर्दगिर्द पेड़ो को लगाने का मकसद होता हैं प्रदूषण को रोकना,ध्वनि प्रदूषण को रोकना मिट्टी की कटान को रोकना किन्तु आज फोर लेन, सिक्स लेन के चक्कर में सारे पौधों पेड़ो को साफ कर दिया जा रहा है जिसका दुस्प्रभाव हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है सरकार,एजेंसियों और लोगों को यह सोचना चाहिए की एक पेड़ को बड़ा होने में कई साल लग जाते है और एक पेड़ कितने लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है,किन्तु इसे काटने में लोग जरा भी अहस नही करते हैं।
यह बात सही है की आज रोड के चौड़ीकरण की आवश्यकता हैं किन्तु एक बार में सभी पेड़ो को काँट कर इस कार्य को करना एक गलत तरीका हैं इसके पीछे सरकार और वन विभाग को विचार करना चाहिए और जब तक भरपाई न हो जाए पेड़ो को काटने के लिए अनुमति नही देनी चाहिए। यदि पृथ्वी पर पेड़ ही न रहे तो शुद्ध हवा और ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी जिससे हमारे जीवन का कोई अस्तित्व ही नही रहेगा।इस लिए पेड़ को काटने से पहले हमें नियमों का पालन करना चाहिए। 

अविनाश सिंह

Monday, August 3, 2020

228:-आलेख।

रोड तो हो रहे है चौड़े पर सिकुड़ रही है लोगों की जिंदगी।

यह बात सभी को अच्छे से पता हैं की पेड़ पौधे हमारे जीवन के लिए कितने महत्वपूर्ण होते हैं,हमें यह जीने के लिए ऑक्सीजन देते है खाने के लिए फल फूल, ईंधन के लिए लकड़ी और बहुत से लड़की से निर्मित सामान। और हम उन पेड़ पौधों को क्या देते है क्या कभी किसी ने सोचा? उसके थोड़ा से बड़े होते ही हम स्वार्थी बन जाते है उसमें एक बाल्टी पानी तक नही डालते है,फिर भी पेड़ हमसे कोई शिकायत नही रखते हैं वह हमें नियमित उपयोगी वस्तु देते रहते हैं किन्तु लोगों की इच्छा और लालच इतनी बढ़ गयी है की लोगों ने पेडों की अंधाधुंध कटान शुरू कर दिया हैं।
एक दिन में न जाने कितने जंगल और बाग साफ हो जा रहे है आज सबसे अधिक कटान होने का कारण हैं रोड आदि का चौड़ीकरण,रोड नाले आदि के निर्माण कार्य हेतु पेड़ो को  काट कर गिराया जा रहा है जिससे रोड तो चौड़े हो रहे है पर लोगों की जिंदगी सिकुड़ रही है वह खुल कर साँस नही ले पा रहे है,रोड के इर्दगिर्द पेड़ो को लगाने का मकसद होता हैं प्रदूषण को रोकना,ध्वनि प्रदूषण को रोकना मिट्टी की कटान को रोकना किन्तु आज फोर लेन, सिक्स लेन के चक्कर में सारे पौधों पेड़ो को साफ कर दिया जा रहा है जिसका दुस्प्रभाव हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है सरकार,एजेंसियों और लोगों को यह सोचना चाहिए की एक पेड़ को बड़ा होने में कई साल लग जाते है और एक पेड़ कितने लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराता है,१1 किन्तु इसे काटने में लोग जरा भी अहस नही करते हैं।
यह बात सही है की आज रोड के चौड़ीकरण की आवश्यकता हैं किन्तु एक बार में सभी पेड़ो को काँट कर इस कार्य को करना एक गलत तरीका हैं इसके पीछे सरकार और वन विभाग को विचार करना चाहिए और जब तक भरपाई न हो जाए पेड़ो को काटने के लिए अनुमति नही देनी चाहिए। यदि पृथ्वी पर पेड़ ही न रहे तो शुद्ध हवा और ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी जिससे हमारे जीवन का कोई अस्तित्व ही नही रहेगा।इस लिए पेड़ को काटने से पहले हमें नियमों का पालन करना चाहिए।  

अविनाश सिंह
8100017450

Saturday, August 1, 2020

226:-आलेख।

21 वर्ष बाद निर्दोषों के शहादत का बदला लिए थे वीर क्रांतिकारी सरदार उधम सिंह।
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए नर संहार को आज भी सोच कर रूह काँप उठता हैं जिसमें कई सौ निर्दोष परिवार ने अपनी जान की कुर्बानी दे दी और कई हजार लोग घायल हो गए थे। इतना ही नहीं कई लोग वहाँ के कुँए में कूद गए थे अपनी जान बचाने के लिए, इस नरसंहार की गूँज आज भी वहाँ के लोगों को सुनाई देती हैं।पंजाब के जनरल डायर ने लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाने का आर्डर दे दिया था,उसी बाग में एक थे उधम सिंह जो वहाँ पानी पिलाने का कार्य कर रहे थे उन्होंने इस घटना को सामने से देखा था और इस घिनोने कृत का बदला लेने की कसम खाई थी।
सरदार उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब में हुआ था बचपन में ही माता पिता का साया सर से उठ गया था और उन्होंने अपनी आधी से अधिक जिंदगी अनाथ आश्रम में बिताया था,जैसा उनका बचपन में शेर सिंह नाम था वह स्वभाव से भी निडर और साहसी थे, वह सभी धर्मो में विश्वास रखते थे इसलिए उन्होंने अपना नाम राम सिंह मोहम्मद आज़ाद रख लिया था।
उन्होंने जलियांवाला बाग का बदला 21 साल बाद लंदन जा कर लिया था जिसके लिए वह 1934 में ही लंदन पहुँच गए थे उन्होंने डायर को भरी सभा में गोलियों से छलनी कर दिया और जलियांवाला में शहीदों का बदला लिया था। हालांकि वह वहां से भागने में नाकाम रहे और 4 जून 1940 को उन्हें दोषी करार देकर 31 जुलाई 1940 को पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई।
आज उधम सिंह के बलिदान दिवस पर पूरे देश उन्हें नमन कर रहा हैं और देश को ऐसे ही वीरों की आवश्यकता हैं जो देशहित के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दे। वह साहस शौर्य और पराक्रम से परिपूर्ण थे जिन्होंने 13 अप्रैल का बदला 21 साल बाद लिया था आज सम्पूर्ण भारत उनके शहीद दिवस पर उन्हें कोटि कोटि नमन कर रहा हैं।

अविनाश सिंह
8010017450

225:-आलेख।

बेहतर शरीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी है योग साधना।
जिस प्रकार हमें जीने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती हैं पीने के लिए जल की,ठीक उसी प्रकार हमें शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रहने के लिए योग करना अति महत्वपूर्ण होता हैं। योग को एक साधना के रूप में करना चाहिए,जिसको नियमित रूप में करने से शरीर स्वस्थ और निरोग रहता हैं। योग करने का मतलब सिर्फ योग सीखना ही नही हैं अपितु योग मतलब स्वयं को पहचानना, आत्मा की शुद्धि करना स्वयं को स्वस्थ रखना होता हैं,अपनी दैनिक दिनचर्या तय करना होता है।
योग से एक दिन में आपको कोई भी लाभ नही दिखने वाला हैं यह नियमित रूप से करने की प्रक्रिया है जिसमें आपको प्रातः सूर्य नमस्कार करना चाहिए,योग करने मात्र से सिर्फ शरीर ही नही स्वस्थ रहता बल्कि आप स्वयं को प्रसन्नचित मुद्रा में देखेंगे, आपके अंदर सकारात्मकता का विकास होगा,आप स्वयं को फुर्तीला महसूस करेंगे और आप मानसिक तनाव से दूर रहेंगे। आज कोरोना काल में सभी को यह नसीहत दी जा रही हैं स्वयं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को,ताकि आप कोरोना से लड़ सके,यदि आप नियमति योग करते है तो आप रोगमुक्त हैं।
योगा करने का सबसे उत्तम समय होता है सूर्य निकलने से पहले और सूर्य ढलने के बाद, दिन में किसी प्रकार का भी योग नही करना चाहिए,यह सत्य ही कहा गया है '' स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिक का निवास होता है ''। "करो योग रहो निरोग"।आज योग के माध्यम से भयानक से भयानक बीमारी का इलाज किया जा रहा हैं हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी भी नियमित योगा करते है और स्वयं को चुस्त दुरुस्त रखते है। योग करने से अच्छे विचारों का मन में स्फुटन होता हैं और मन शांत और प्रसन्न रहता हैं।
इस कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में योग अत्यंत महत्वपूर्ण  और लाभकारी साबित है,किन्तु योग करने से पहले व्यक्ति को योग के सभी नियम,हानि लाभ आदि का ज्ञान होना जरूरी होता हैं।इस समय सरकार और कई सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियो द्वारा अनेक तरह के कार्य किये जा रहे हैं विभिन्न संस्थान और सबसे ऊपर डॉक्टर और पुलिस कर्मी के द्वारा किये गए कार्य सबसे महत्वपूर्ण हैं,वे अपनी जान जोखिम में डालकर हम सब को बचा रहे हैं इस लिए हमारा भी यह फर्ज बनता है उन्हें सम्मान दे, हम घर पर रहे और सरकार द्वारा तय नियमों का पालन करें सिर्फ योग करने से आप सफल नागरिक नही बन सकते हैं योगिक क्रिया को दैनिक जीवन में शामिल करना ही काफी नही हैं हमारा व्यवहार भी इस काल में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

अविनाश सिंह
8010017450

Thursday, July 30, 2020

223-आलेख।

आखिर कोरोना योद्धा सम्मान के असली हक़दार कौन हैं?अविनाश सिंह।
कोरोना वैश्विक महामारी से जहाँ पूरा देश जूझ रहा है वही कुछ लोग इस महामारी में देश के लिए ढाल बन कर आये है जो अपनी जान की परवाह किये बिना सभी की मदद कर रहे हैं। आपनी जान जोख़िम में डाल कर सभी को जीवन दे रहे है।
यह एक गंभीर प्रश्न है जिसपे हमें विचार करना चाहिए, आज जिसे देखों वह कोरोना योद्धा सम्मान लेकर स्वयं को कोरोना योद्धा मान रहा हैं जो की गलत है और यह सम्मान की गरिमा को कही न कहीं आहत पहुँचा रहा हैं। हमारे प्रधान मंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने पूरे देश से आह्वान किया था की डॉक्टर,पत्रकार और पुलिस जो निरंतर कोरोना काल में अपने परिवार से दूर रह कर सभी की सेवा कर रहे है वही इसके असली हकदार हैं किन्तु इसका उल्टा देखने को मिल रहा हैं,आम जनता इस सम्मान को लेकर स्वयं में फूला नही समा रही हैं और असली हकदार पीछे रह जा रहे हैं।
इस संकट के काल में पत्रकार जो हमारे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ होते हैं सुबह से शाम तक खबर ला रहे हम सभी को जानकारी दे रहे हैं आज उनके साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है जैसा की ग़ाज़ियाबाद में विक्रम जोशी के साथ देखने को मिला था।.उनकी निर्मम हत्या कर दी गयी। यह देखने को मिल रहा है कोई दो चार कविता लिख कर खुद को कोरोना योद्धा मानने लगा हैं कोई दो चार मास्क आदि बांट कर खुद को कोरोना का सम्मान ले रहा, कोई सेमीनार आदि कर के यह सम्मान इक्कट्ठा कर रहा हैं।
मैं अविनाश सिंह स्वयं एक कवि और समाज सेवक हूं किन्तु मैं इस सम्मान का बहिष्कार किया है लेने से और हर संस्था को मना किया हूं मुझे इस सम्मान से न सम्मानित न किया जाए। दो चार कविता लिख कर कोई कवि बन जाता है तो उन लोगों से निवेदन है दो चार अच्छे कार्य करके भगवान भी बन जाए। यह सम्मान की गरीमा कुछ संस्था अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए बांट रहे है जो की गलत है इस सम्मान का असली हकदार वही है जो निरंतर अपनी सेवा भाव से कोरोना से लोगों की जान बचा रहा है जैसे डॉक्टर पत्रकार पुलिस आदि।
यदि आप कुछ नही कर सकते है तो इस सम्मान के आप हकदार नही हैं कुछ नही यदि कर सकते है तो कम से कम रक्त दान ही कीजिये तब भी आप इस सम्मान के हकदार रहेंगे। मैं पूरे देश से यह आग्रह करुंगा की असली कोरोना योद्ध को ही इस सम्मान से नवाज़ा जाए।

अविनाश सिंह
8100017450

222:-आलेख।

राफेल का भारत आने पर लोगों में खुशी की लहर।अविनाश सिंह।

सन 2019 से ही जबसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी द्वारा राफेल के भारत आने की खबर मिली थी तब से लोगों के बीच में एक खुशी की लहर थी काफी लंबे काल के बाद आखिर वह वक़्त आ ही गया जब फ्रांस से पांच राफेल भारत की धरती पर आ गया है और सुरक्षित अंबाला पहुँच चुका हैं इससे सिर्फ बॉर्डर ही नही अपितु यह पूरे देश की सुरक्षा के लिए उठाया गया सबसे बड़ा कदम है।
कोरोना काल में जब पूरा देश परेशान है कोई अच्छी खबर नही सुनने को मिल रही थी तब राफेल के भारत आने की खबर से पूरा देश झूम उठा है कही मिठाई तो कही हवन पूजन हो रहा है और होना भी जरूरी है क्योकि यब हमारे देश की सुरक्षा व्ययस्था की बात है। जिस प्रकार से चीन और पाकिस्तान आये दिन भारत पर अपनी अभद्र हरकते करते हैं उसके मद्दे नज़र यह कदम सरकार की तारीफे काबिल हैं।
राफेल लड़ाकू विमानों का भारत में आना हमारे सैन्य इतिहास में नए युग की शुरूआत की यह एक सराहनीय कदम हैं जिसका सभी को बेसब्री से इन्तेजार था। राफेल में अनेक ऐसे मैकेनिज्म है जिसके द्वारा कई सौ किलोमीटर दूर से दुश्मनों के छक्के छुड़ाया जा सकता है।इसमें अनेक ऐसे आधुनिक तकनीकी है जैसे यह 2130 किलोमीटर/घंटा की रफ्तार से उड़ने में सक्षम हैं,3700 किलोमीटर तक इसकी मारक क्षमता है,यह लगातार 10 घंटे उड़ सकता है एक मिनिट में 60 हजार फुट की ऊंचाई पर जा सकता है,हवा में ईंधन भरा जा सकता है।

अविनाश सिंह

8001017450

221:-आलेख।

कैसे मनाये रक्षाबंधन पर्व इस कोरोना वैश्विक महामारी में।

जी हा,अगस्त का महीना जल्द ही आ रहा है और इसी अगस्त के पहले सप्ताह में पड़ने वाला है सम्पूर्ण देश में मनाया जाने वाला पवित्र पर्व रक्षाबन्धन। किन्तु इस वर्ष रक्षाबंधन कुछ ख़ास होने वाला क्योंकि इस बार देश में कोरोना जैसी महामारी हैं जिसनें घर से दूर जाना क्या घर से बाहर निकलने पर भी पाबंदी हैं।
ऐसे में रक्षाबंधन पर्व कैसे मनाये यह एक प्रश्न है यदि किसी की बहन घर से दूर है या भाई घर से दूर है तो कोशिश रहे की न उसके घर जाए ना ही उसे घर बुलाये।रक्षाबंधन भाई बहन के प्रेम का पर्व हैं जिसमें बहन भाई की कलाई पर रेशम की डोर बांंधती हैं और उसके लंबे उम्र की दुआ करती है इस रक्षाबंधन पर आप कोशिश रहे की बाज़ार से राखी न खरीदे अपितु अपने हाथों से बनाये।
यदि आप घर से दूर है तो आप राखी कूरियर आदि से भेज दीजिये या राखी बना कर रख लीजिये जैसे ही कोरोना खत्म होगा जब भी आपकी मुलाकात होगी आप राखी बांध सकते हैं। यह जरूरी नही की भाई बहन का प्रेम सिर्फ रक्षाबंधन के दिन ही दिखें। आप अपने भाई के लंबे उम्र की दुआ करिये घर बैठ कर ही उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करिये।
कोरोना ऐसा वायरस है जो एक दूसरे के संपर्क में आने से फैल रहा हैं जिसमें एक दूसरे से दूरी बना कर इससे बचा जा सकता हैं सोशल डिस्टनसिंग का पालन कर इससे बचा और अन्य लोगों को बचाया जा सकता हैं। ऐसे में रक्षाबंधन पर्व पर बाजार से लगाए कही बाहर न जाए और यह पर्व घर पर रह मनाइए। यदि जिंदगी है तो जीवन में कई बार रक्षाबंधन मनाया जा सकता हैं इस लिए इस कोरोना पर अपने घर रह कर रक्षाबंधन मनाये और वीडियो कॉलिंग आदि का सहारा लेकर इस पर्व को खास मनाइए।

अविनाश सिंह
8010017450

220:-आलेख।

अयोध्या राम मंदिर पूजन में कौन सी सामग्री कहाँ से आ रही हैं।
अब वह दिन दूर नही जब अयोध्या राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होने वाला हैं जिसकी तैयारियां जोड़ो पर हैं कई दशकों की कठिन तपस्या के बाद अयोध्या में राम लला का भव्य स्वागत टेंट से मंदिर में होगा जिसकी नीव 5 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के कर कमलो द्वारा सम्पन्न होगा।
राम जी की जन्म नगरी अयोध्या अब सजने लगी है रोड़ सड़के आदि चौड़े होने लगे हैं सभी को बेसब्री से इन्तेजार हैं 5 अगस्त के तारीख का जिस दिन मंदिर पूजन और नींव रखी जाएगी। इसके बाद मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होगा और अयोध्या में विशाल मंदिर का निर्माण होगा।
इस मंदिर के बनने वाले नींव में देश के सभी पवित्र स्थलों से लाई गई मिट्टी डाली जाएगी। इसी क्रम में  देश की राजधानी दिल्ली के कई पवित्र स्थानों की मिट्टी पीतल के कलशों में भरकर अयोध्या भेजी गई हैं इसे पांच अगस्त को निर्माण के दिन मंदिर की नींव में डाला जाएगा। 
अयोध्या मंदिर निर्माण के लिए देश की प्रमुख नदियों का जल भी एकत्र किया गया हैं जिसे मंदिर के नींव में डाला जाएगा।
इसी कर्म में भोलेनाथ की नगरी काशी से अनुष्ठान के दौरान नींव में स्थापित करने के लिए सोने के शेषनाग के साथ चांदी का कच्छप,चांदी के पांच बेलपत्र,सोने की वास्तुदेवता, सवा पाव चंदन और पंचरत्न जाएगा। इन सभी सामग्री को  अयोध्या ले जाने से पूर्व बाबा विश्वनाथ को अर्पित किया जाएगा। इस मंदिर के निर्माण हेतु कई करोड़ हिन्दू परिवार से दान आदि लिया जाएगा जो भी प्राप्त सहयोग होगा वह मंदिर के निर्माण कार्य में लगाया जाएगा।
अयोध्या मंदिर को लेकर देश की उच्च अदालतो में कई वर्षों से केस चल रहा था जिसका फैसला 9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर के निर्माण में फैसला दिया गया और अब 5 अगस्त को मंदिर की पहली ईंट मोदी जी द्वारा रखी जाएगी। जिसका सभी को बेसब्री से इन्तेजार है किन्तु इस मौके पर आम जनता को दर्शन करने के लिए पाबंधी लगाया गया हैं वह घर रह कर पूजा अर्चना  कर सकते है और सीधा प्रसारण टीवी के माध्यम से देख सकते हैं।

अविनाश सिंह
8010017450

219:-आलेख।

नई शिक्षा नीति 2020  क्या हैं कुछ खास आइये जानते है।
बदलते परिवेश के साथ शिक्षा नीति में भी कुछ बदलाव की आवश्यकता थी अभी तक भारत में 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति ही लागू था जिसमें 1992 में कुछ परिवर्तन करके नई शिक्षा नीति 1992 लागू किया गया जिसे प्रोग्राम ऑफ एक्शन 1992 के नाम से जाना जाता हैं। इस नीति में कुछ बदलाव तो जरूर किया गया था किन्तु ये परिवर्तन बहुत विशेष नही थे और मोदी सरकार द्वारा अपने शासन काल में यह घोषणा की गयी थी की एक नई शिक्षा नीति का गठन किया जाएगा।
बुधवार को इस निर्णय पर मोहर लग गया और अब नई शिक्षा नीति सम्पूर्ण भारत में लागू कर दी गयी हैं और इसी के साथ मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम परिवर्तित कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया हैं। कैबिनेट की मंजूरी से करीब 34 साल बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और सुधार किया गया है। इसरो के प्रमुख के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति ने नई शिक्षा नीति 2020 तैयार किया था जिसे कैबिनेट की बैठक ने बुधवार को मंजूरी दे दिया।
 इस नीति के तहत प्राथमिक स्तर (पाँचवी क्लास तक) पर मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा का प्रावधान है इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता हैं विदेशी भाषा सेकेंडरी लेवल से होगी,किसी भी भाषा को छात्रों के ऊपर थोपा नही जाया जाएगा। शिक्षा की मुख्य धारा से वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का नए शिक्षा केंद्रों की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है।जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा में लगाया जाएगा। स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम संरचना लागू किया जाएगा।
 इस नीति के अंतर्गत बुनियादी शिक्षा और संख्यानतक ज्ञान पर विशेष बल दिया गया हैं।
 सामाजिक और आर्थिक नज़रिए से वंचित समूहों की शिक्षा पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा। यह नीति 3 से 18 वर्ष आयु के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता हैं। इस नीति में सबसे खास हैं मल्टीप्ल एंट्री और एग्जिट सिस्टम को लागू करना जिसके तहत बीच में शिक्षा से वंचित छात्रों को लाभ मिलेगा। नई शिक्षा नीति में छात्रों को ये आज़ादी भी होगी कि अगर वो कोई कोर्स बीच में छोड़कर दूसरे कोर्स में दाख़िला लेना चाहें तो वो पहले कोर्स से एक ख़ास निश्चित समय तक ब्रेक ले सकते हैं और दूसरा कोर्स ज्वाइन कर सकते हैं।
इस शिक्षा नीति में और भी बहुत से प्रावधान हैं जिसके माध्यम से शिक्षा जगत में सुधार किया जा सकता है और शिक्षा का स्तर ग्लोबल स्तर पर लाया जा सकता हैं जिसके लिए सरकार और कैबिनेट द्वारा प्रयास किया जा रहा हैं नई शिक्षा नीति 2020 शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति के रूप में  उभर कर आएगी। जिसका पूरे देश को कई सालों से इन्तेजार था।

अविनाश सिंह
8010017450

Monday, July 20, 2020

217:-आलेख।

कोरोना काल ग़रीब जनता बेहाल दुकानदार मालामाल:-अविनाश सिंह।

यह कहना गलत नही होगा की कोरोना वैश्विक महामारी से आज पूरा देश आज जूझ रहा हैं जब से यह कोरोना देश में आया है तब से कोई सबसे अधिक ग्रषित हैं तो वह है गरीब तपके के लोग जैसे गरीब महिला,किसान और मजदूर। जिन्हें अनेक प्रकार के दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। शुरुआत से ही देखने को यह मिल रहा है की गरीब मजदूर पैदल कई सौ किलोमीटर की यात्रा पैदल कर के जैसे तैसे अपने घर पहुँचा हैं।
भले सरकार इन्हें कितना भी राशन दे रही हो या खाने का इंतेजाम कर रही हो किन्तु बीच में कही न कही सरकारी साठगांठ की वजह से उन्हें उनका हक नही मिल पा रहा हैं आधा से अधिक राशन तो बनिया के दुकान पर आ जा रहा है और ग़रीब को मिल रहा तो सिर्फ ना के बराबर। बेचारे मजदूर अपनी व्यथा किससे कहे ,कहाँ जाए। इस लोकडौन में सबसे अधिक चांदी है तो वह है किराना स्टोर की वो मजबूरी का कही न कही फायदा उठा रहे हैं और वस्तुओं के मूल्य से कही अधिक दाम पर बेच रहे है। जिसे ग़रीब मजदूर खरीदने पर मजबूर है।
ऐसा लगता है सारे नियम कानून सिर्फ गरीब वर्ग के लिए ही बनाया गया हैं उन्हें इस कोरोना काल में बेरोजगार होना पड़ा, कितनो ने तो जान दे दी, कितने बेघर हो गए इस बेरोजगारी के चलते। सरकार ने नियम तो जरूर बनाये हैं पर नियम सिर्फ ग़रीब जनता पर लागू हो रहा हैं और किसी पे नही, सरकार कालाबाजारी रोकने में नाकाम साबित हो रही हैं जिसका फायदा बड़े दुकानदार और किराना स्टोर वाले उठा रहे है।
सिर्फ यहीं नही ग़रीब जनता कई अन्य प्रकार की समस्या से प्रभावित हो रहे है जैसे उन्हें सही समय पर इलाज नही मिल रहा,उनका कोरोना टेस्ट नही हो रहा हैं,उन्हें कोरोना बीमारी के समय में राशन की समस्या से जूझना पड़ रहा है जिसका खामियाजा में वो अपनी जान गवा रहे है। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर इसपर ध्यान देना चाहिए और नियम तोड़ने वाले को सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए,गरीबों का हक आज सरेआम बाजार में ऊँचे दाम पर बिक रहा और उसे ही गरीब खरीदने पर मजबूर है।
मैं अविनाश सिंह आप सभी से निवेदन करता हूं की कहीं भी आप अगर ऐसी परिस्थिति देख रहे तो उसकी शिकायत सरकार के उच्च अधिकारियों से करिये और ग़रीब को उसका हक दिलाइये।

अविनाश सिंह

Sunday, July 19, 2020

211:-आलेख।

शिक्षा वह कुंजी है जो हर सफलता के दरवाज़े को खोलती  हैं।-अविनाश सिंह।

जिस प्रकार हमें जीने के लिए वायु की आवश्यकता होती है,ठीक उसी प्रकार जीवन में सफल व्यक्ति बनने के लिए शिक्षा का बेहद महत्व हैं शिक्षा के बिना जीवन में सफलता के किसी भी सीढ़ी को नही चढ़ा जा सकता हैं। यह किसी बच्चें के सर्वांगीण विकास से लगाये देश के विकास और सशक्तिकरण का स्तम्भ होता हैं।
शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान से न होकर वास्तविक ज्ञान से होना चाहिए,शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य के नैतिक मूल्यों का विकास होना चाहिए।भारत के संविधान रचयिता बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर जी का त्तीन ही सूत्र था- शिक्षा, संगठन और संघर्ष। वे आह्वान करते थे,शिक्षित करो, संगठित करो और संघर्ष करो। पढ़ो और पढ़ाओ।शिक्षा में कभी भी भेद भाव नही होता है यह सबके लिए समान होती है।
हमारे समाज में बेटियों को शिक्षा से वंचित किया जाता,उसे घर के कामों में उलझाया जाता हैं पिता को उसके जन्म से उसके शादी की चिंता होती है किन्तु वही पिता उसके शिक्षा के बारे में नही सोचता। ऐसा करना किसी पाप से कम नही है, शिक्षा शेरनी के दूध की तरह होती है जो जितना पिएगा उतना ही दहाड़े गा इसलिए आधी रोटी कम खाओ लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाओ।
शिक्षा जीवन की वह  कुंजी है जो सारे सफलता के दरवाजे खोल देती है,शिक्षित व्यक्ति हर जगह पूजे जाते है हर जगह उन्हें सम्मान मिलता है,शिक्षा के बिना जीवन का कोई भी उद्देश्य नही है।कोई व्यक्ति गरीब या अमीर नही होता है यह शिक्षा ही है जो किसी को गरीब या अमीर बनाती है। ‘सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात शिक्षा वही है जो हमे  मुक्ति दिलाती है। जो हमें उचित अनुचित का ज्ञान प्रदान करती है।
शिक्षा वह साधन है जिसके माध्यम से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है हर युद्ध लड़ा जा सकता है हर कार्य को सरल और सहज बनाया जा सकता है।जो देश जितना प्रगति कर रहा है उस देश की शिक्षा का स्तर भी उतना ही ऊपर है चाहे वो अमेरिका ही क्यों न हो।
जीवन में शिक्षा का कोई अंत नही है,आप जब तक जीवित है तक तक शिक्षा ले सकते है चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में। मैं अविनाश सिंह पूरे समाज वर्ग से यह प्रार्थना करता हूं की भले आप एक रोटी कम खाइए किन्तु अपने आने वाले भविष्य को शिक्षित जरूर करियेगा ताकि हमारा देश एक समृद्धशाली देश बन सके।

अविनाश सिंह

8010017450

Friday, July 17, 2020

206:-आलेख।

परीक्षा में कम अंक आने पर भी नही होना निराश या परेशान :-अविनाश सिंह।

जी हां,जैसा   की आपको विदित है की बोर्ड के रिजल्ट आने  शुरू हो गए हैं और हर बोर्ड में एक से एक धुरंधर निकल रहे हैं कोई 100 प्रतिशत तो कोई 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर रहा हैं। और इसमें कुछ ऐसे भी है जो की विभिन्न परिस्थितियों के कारण अनुत्तीर्ण हो रहे या कम अंक प्राप्त कर कर रहे हैं। किन्तु इसका यह मतलब नही की जिंदगी यही खत्म हो गयी है या इसके आगे कुछ नही हैं। यह तीन घंटे का पेपर आपकी जिंदगी नही बदल देगा, किन्तु आप यदि प्रयास करेंगे तो अनेकों सफलता हासिल कर सकते हैं।
अक्सर अखबारों में यह पढ़ने को आ रहा की कम अंक आने की वजह से वह डिप्रेशन या आत्मदाह कर लिया,यह एक दम अनुचित कदम हैं जीवन में सफल सिर्फ 90 प्रतिशत अंक लाकर नही हुआ जा सकता हैं इसके अन्य माध्यम भी हैं सफल होने के, जो अध्यापक आपकी कॉपी की जाँच कर रहा होगा वह भी जीवन में आपसे कम अंक प्राप्त किया होगा किन्तु आज वह उस लायक है की आपको अंक दे रहा हैं।
जीवन में सफल होने का मतलब हैं आप एक अच्छे नागरिक बनिये, एक अच्छे बेटा बनिये, एक अच्छे शिष्य बनिये, एक अच्छे पिता बनाइये यही असली सफलता हैं।परीक्षा के अंक आपको कही पर काम आएगा वह भी आज के कंपीटिशन के दौर में एक काजग के टुकङे समान है।
अनेको ऐसे महान पुरुष हुए जो असफलता को सफलता की कुंजी माने। जिसके प्रत्यक्ष उदहारण थे राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जी जो स्वयं आर्मी के चयन बोर्ड से कई बार बाहर हुए थे, किन्तु वह हिम्मत नही हारे थे और आज उन्हें मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है।
मैं अविनाश सिंह स्वयं एक कवि होने के नाते अपनी बात बताऊँ तो मैं शुरू से 90 प्रतिशत के ऊपर अंक प्राप्त किया अनेको बोर्ड में। किन्तु आज सारी डिग्री एक कोरे कागज के समान हैं जिसका कुछ ही महत्व है। आप स्वयं में एक यूनिक इंसान है आपके अंदर अनेको छमता है जिसे आपको स्वयं पहचानना है और उसपर कार्य करना है और एक दिन सफलता आपके कदमों को चूमेगी।
यदि इन सब बातों पर भी आपको विश्वास नही है तो आप अपने अभिभावकों से उनके बोर्ड के अंक पूछियेगा वो आपको स्वयं बताएंगे की वो कितने अंक अपने समय में प्राप्त किये थे।आप यह सोचिये जो आपने पाया है वह आपकी मेहनत का फल है और मेहनत का कोई अंत नही तो इस बार कम किये मेहनत तो कम फल, अगली बार और दुगने रफ्तार से मेहनत करके और अच्छा फल प्राप्त करना है।
कभी गलत कदम उठाने से पहले अपने परिवार के सदस्यों के बारे में सोचिएगा,मैं अभिभावकों से भी अनुरोध करता हूं की यदि आपके बच्चे के कम अंक आये है तो उसे प्रोत्साहित करिये की आगे और अच्छा करें ना की उसपर दबाव बनाये या उसे प्रताड़ित करे। मैं कुछ पंक्तिया देता हूं जिसे अपने जीवन में उतरियेगा।-
सफलता दूर है पर नामुम्किन नही,कदम छोटे हो पर रुके नही।जरूरी नही हर किसी को मुकाम मिल जाये,सफलता के परचम भी हर कोई फहरा जाए। मिलेगी सफलता कुछ प्रयासों के बाद,होगी खुशी दूगनी इसी मंजिल के साथ। प्रयास करो,प्रयत्न करो भूल करो,अभ्यास करो,मिलेगी सफलता  बस थोड़ा तुम विश्वास रखो।न हारों हिम्मत बस कदम को तुम आगे बढ़ाओ,लड़खड़ाओ अगर तो अड़िग होके खड़े हो जाओ।

अविनाश सिंह
8010017450

Thursday, July 16, 2020

203:-आलेख।

 कोरोना के बाद एक नए नव भारत का उदय होगा-अविनाश सिंह
जैसा की आप सभी को विदित हैं  की कोरोना वायरस एक वैश्विक महामारी हैं जिससे भारत देश लड़ रहा हैं,इस वायरस से देश में अनेकों मरीज रोजाना मिल रहे हैं और वर्त्तमान में कई सौ मौत हो चुकी हैं।कोरोना के बचाव हेतु अनेकसावधानियों को सरकार द्वारा और लोगों के द्वारा जनता को जागरूक किया जा रहा हैं।जिस प्रकार कोरोना से लड़ने के लिए सरकार प्रयास कर रही हैं आज नही तो कल यह देश से चला जाएगा,लोग आज कोरोना से लड़ने के लिए अनेक सावधानी कर रहे है जैसे मास्क का प्रयोग,हाथों की निरन्तर धलना आदि किन्तु कोई कल के बारे में नही सोच रहा हैं कल कब कोरोना इन देश से चला जाएगा तो हमे स्वयं में अनेकों परिवर्तन करना है जो हमें, हमारे परिवार के लिए, हमारे     समाज, देश के लिए जरूरी हैं,कोरोना भले ही घातक है किन्तु इसनें अनेकों सीख लोगों को दिया हैं।
मैं अविनाश सिंह एक कवि होने के नाते आपको कुछ  परिवर्तन बता रहा हूं जिसे आप अपने दैनिक जीवन में कोरोना के जाने उपरांत जरूर अपनाएगा, जैसे घर के कामों में महिलाओं के साथ हाथ बटाना,घर पर कुछ न कुछ हरे सब्जी गमलों में निरंतर उगाना,यातायात का कम से कम प्रयोग करना,काम वाली बाई,नौकरों के साथ हमेशा प्रेम भाव रखना,गरीबों को हफ्ते में एक दिन भोजन कराना,गंदगी कम से कम करना,ऑनलाइन कम ऑफलाइन स्टोर से सामान खरीदना,साल में एक बार पौधरोपण करना,अपने से बड़ो का हमेशासेवा करना,डॉक्टर,पुलिस,नर्स,पत्रकार,किसान,सरकारी कर्मचारियों का सम्मान करना,आस पास सफाई रखना,छोटे काश्तकारों से सामान या वस्तुएं खरीदना आदि।कोरोना के जाने के बाद गाड़ी फिर से वही पटरी पर आएगी किन्तु हमें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक और सतर्क रहना होगा यदि इन सभी नियमों का पालन किया जाए तो निश्चित कोरोना के बाद एक नव भारत का निर्माण होगा।

अविनाश सिंह
8010017450

Thursday, July 9, 2020

132:-आलेख।

नही दे सकते सम्मान तो मत करो पुलिस का अपमान:-अविनाश सिंह

यदि आप डॉक्टर है तो आपका कार्य हैं मरीजों का इलाज करना,वकील है तो आपका कार्य हैं वकालत करना,शिक्षक हैं तो आपको अध्यापन कार्य करना हैं।बात बिल्कुल सही हैं आपको एक कार्य निर्धारित हैं और आपको सरकार उसी कार्य हेतु वेतन दे रही हैं, किन्तु बात जब पुलिस की करते हैं तो समझ ही नही आता की उनका कौन से कार्य हैं हर कार्य में पुलिस ही रहती हैं आखिर क्यों?ऐसा क्यों?,झगड़ा हो तो पुलिस, चोरी हो तो पुलिस,मेले,प्रदर्शनी हो तो,नेता जी का आगमन हो तो पुलिस आखिर ये अन्याय क्यों है पुलिस के साथ।क्या वह इंसान नही?क्या उनका परिवार नही,क्या वो बाल बच्चे वाले नही है? सवाल तो बहुत है और जवाब कुछ नही।इस देश में कोई भी काम हो वह बिना पुलिस प्रसाशन के नही हो सकता। हत्या,डकैती,मर्डर,मेला आयोजन,चुनाव आयोजन,परीक्षा आयोजन से लगाए हर एक काम में पुलिस की आवश्यकता होती हैं। किन्तु उनको उनके हक का ना ही सुविधायें मिलती, न वेतन, न साधन। यह गलत है एक अध्यापक जो छ: घण्टे ड्यूटी करता उसका वेतन भी एक पुलिस वाले से कही अधिक है जो बारह घंटे से अधिक सेवा दे रहे हैं।बात यही तक खत्म नही होती, बात तो तब आहत की बढ़ जाती हैं जब हमारा ये समाज भी उसे गलत नजरिये से देखता हैं अनेकों उल्टे सीधे टिप्पणियां करता हैं।जरा सोचिये एक बार जब कहीं चार दिन पहले मरी लाश मिलती है तो लोग सबसे पहले इन्हें ही फ़ोन करते है और यह समाज तो अपने नाक बन्द करके दूर से देखता है किन्तु यही हमारे योद्धा पुलिस के लोग ही  उसके शिनाख्त से लेकर पंचनामा तक कराते हैं।
हा, यह कहना गलत नही की सभी पुलिस वाले ईमानदार होते हैं,कुछ गलत भी होते हैं एक मछली के खराब होने से तालाब तो दूषित हो जाता किन्तु पूरे तालाब की मछली नही खराब होती। शासन में कुछ खामियां हैं जिसके लिए सरकार प्रयास कर रही सुदृढ़ करने की। जिस प्रकार आज देश में कोरोना एक वैश्विक महामारी हैं तब भी यह पुलिस पीछे नही हटी और देश सेवा के लिए अपने जान को दाव पे लगा कर आपको सुरक्षित कर रही हैं आखिर क्यों यह आपको हमको सोचना चाहिए। किन्तु आज समाज उस पर ही लाठी डंडे से प्रहार कर रहा हैं।यह गलत है, मैं अविनाश सिंह स्वयं एक समाज सेवक और कवि होने के नाते आपसे गुजारिश करता हूं की पुलिस प्रसाशन के प्रति अपने नजरिये में परिवर्तन लाइये,यदि आप पुलिस की मदद नही कर सकते तो उनको भला बुरा नही बोलिये और अच्छे नागरिक होने का परिचय दीजिये।

अविनाश सिंह
8010017450

131:-आलेख।

पत्रकारों का करो सम्माम तभी बनेगा देश महान-अविनाश सिंह। 

कहना बिल्कुल भी गलत नही है की पत्रकारिता हमारे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। यह हमारे तीनों स्तम्भ की देख रेख कर उचित मार्गदर्शन का कार्य करता हैं।जिस प्रकार हमारे देश में क्राइम बढ़ रहा है उसे लोगों के सामने लाने में यह पत्रकार,मीडिया जगत का अहम किरदार रहता हैं।घटना के होने से लेकर उसके तह में जाने तक,सच की खोज करना,दूध का दूध पानी का पानी करना इनके अहम कार्य होते हैं।
वैसे तो कहने वालो का क्या है लोगों के अनुसार मीडिया और पत्रकार पर अनेकों प्रश्न उठाये जाते हैं किन्तु सत्य यह है की जो नदी की गहराई को नापने की हिम्मत रखता है उसी के पाँव गीले होते हैं।सोच कर रूह कांप जाता है एक पत्रकार के दैनिक जीवन को देखकर,सुबह से शाम तक ख़बर,उसकी पड़ताल करना,हत्या,मर्डर,रेप,चोरी,धमाका जैसी भयावक कार्य इनके रोजमर्रा जीवन में होते हैं।
नेताओं से लेकर मंत्रियों तक का प्रेशर इनपे होता है किन्तु यह अपने कार्य को निष्ठा से निर्वहन करते हैं। आज हमारे देश में कोरोना ऐसी वैश्विक महामारी हैं,लोग घर में हैं किन्तु यह पत्रकार जगत आज भी अपने कार्यों से पीछे नही हैं अपने जान की परवाह किये बिना अपने परिवार को पीछे रख यह देश सेवा में लगे हैं, निरन्तर कोशिश करके हमें हर एक घटना से रूबरू करा रहे है।
इस कड़ी धूप में जब घर से निकलना मुश्किल हैं तब यही पत्रकार और मीडिया जगत गल-गली घूम कर लोगों को कोरोना के राहत सामग्री बाँट रहे हैं,लोगों को जागरूक कर रहे है। गरीब से लगाए आम जनता की आवाज को सुन रहे हैं,मैं अविनाश सिंह स्वयं एक कवि और समाज सेवक होने के नाते इस देश की जनता से निवेदन करता हूं की यदि आप कुछ कर नही सकते तो कम से कम पत्रकारिता जगत का सम्मान करें इनके कार्य को,इनके त्याग को समझे और एक सच्चे नागरिक होने का परिचय दीजिये।

अविनाश सिंह
8010017450

130:-आलेख।

स्वयं की सोच बदलने से आएगा सकारात्मक परिवर्तन:-अविनाश सिंह।

निर्भया कांड,कठुआ रेप, फ़ीर ट्विंकल रेप कांड और अब नया नया है हैदराबाद का डॉ प्रियंका रेड्डी रेप केस।क्या है ये सब क्यों हो रहा है, ये सब आखिर किस कारण से हो रहा है, इसके पीछे की वजह क्या है, क्यों यह बार-बार हर मिनट हर घंटे हर दिन हर महीने हो रहा है,आखिर क्या वजह है कि महिला सुरक्षित नही है अपने घरों में भी। क्या कानूनी व्यवस्था सही नही? क्या हमारे देश का संविधान सही नही? जी नही ऐसा नही है सब कुछ सही होने के बाद भी सबसे बड़ी कमी हमारे समाज की है हमारे समाज के सोच की है जब तक लोगों के मन मे परिवर्तन नही आएगा न तब तक न ये कानून कुछ कर पायेगा न ही संविधान।
मैं अविनाश सिंह स्वयं एक समाज सेवक और लेखक होने के नाते यह महसूस किया हूं कि लोगों के मन मे अनेक प्रकार की गंदगी है जिसे पहले साफ करना होगा तभी कुछ सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है। आज 12 साल का लड़का रेप कर रहा उसे संविधान का कखग भी नही पता है उसे नही पता कि इस घिनौनी अपराध को करने के बाद मुझे क्या सजा मिलेगी, किन्तु उसे इस बात का पता है कि मुझे किसी के साथ रेप करना है।आखिर यह सोच कहाँ से आई है मैं नही समझ पाता हूं। समाज के सभी वर्ग गलत हो ये भी उचित नही किन्तु हमें अपने अंदर, लोगों के अंदर एक अच्छे सोच का विकास करना पड़ेगा, दूसरे की बहन को आपनी बहन समझना पड़ेगा। 
चार पंक्ति मैं उन लोगों के लिए लिखता हूं जो कहते है छोटे कपड़े बलात्कार का कारण है उनके लिये- 
कपड़े हमारे छोटे नही है
बस सोच तुम्हारी छोटी है
हम फुल कपड़े भी पहन लिए
फिर भी नज़र तुम्हारी खोटी है।
जी हां यही सत्य है प्रियंका बहन के साथ जो कुछ हुआ उसकी कल्पना करने मात्र से रोंगटे खड़े हो जा रहे है जिस बेटी को समाज मे दुर्गा,लष्मी का नाम दिया जाता है वो आज आग से लिपट रही है। समाज सिर्फ अपनी सोच में परिवर्तन लाये,फिर  कोई कानून और न्याय व्यवस्था की जरूरत ही नही पड़ेगी।आखिर पुलिस प्रसाशन अब और कहाँ तक रहेगी जब गंदगी लोगों के मन में है तो पुलिस भी कहाँ तक सुरक्षित कर पायेगी बहु बेटियों को।"दूसरों की सोच को बदलने में कई वर्ष लगेगा,स्वयं की सोच को बदलने में चंद सेकेंड का समय लगेगा"।जी हां मेरी यह पंक्ति यदि सभी पुरुष वर्ग समझ जाएं तो नव भारत का निर्माण होगा और रेप जैसे अपराध का देश से नामों निशान मिट जाएगा।

अविनाश सिंह
8010017450

129:-आलेख।

सोशल साइट पर फ़ोटो लगाना कोई सच्ची श्रद्धांजलि नही।अविनाश सिंह।

क्या है सच्ची श्रद्धांजलि, जी हां,यह सुनते ही दिमाग में अनेकों ख्याल आने लगता है कि श्रद्धांजलि आखिर हैं क्या ? आज समाज में इसकी परिभाषा बदल गयी हैं। लोगों के पास अब वक्त नही की किसी का दुःख हर सके, उनसे बात कर सकें, उनके मर्ज को समझ सकें।
आज मनुष्य अपने कार्यो में इतना लिप्त हो गया हैं कि उसे अन्य कोई भी चीज़ नही दिखती हैं। किसी भी परिवार के सदस्य के देहांत होने पर उसकी फ़ोटो व्हाटसअप,फेसबुक जैसे न जाने कितने सोशल साइट पर अपलोड की जाती हैं और लिख दिया जाता है भगवान इनकी आत्मा को शांति दें। क्या यह सच्ची श्रद्धांजलि है। जी बिल्कुल नही,यह एक ढोंग हैं दिखावा हैं, ऐसे में लोगों के फ़ोटो पर न जाने कंमेंट आने लगते है,लाइक आने लगते हैं और हर बार इंसान यह चेक करने में मशरूफ़ रहता हैं की कितने लाइक आये कितने कंमेंट हुए हैं।
मैं अविनाश सिंह स्वयं एक समाज सेवक होने के नाते मेरा मानना है सच्चे मन से किसी को याद करना किसी के पुण्य तिथि पर का अर्थ है उसके नाम से कुछ दान करना, गरीबों में कुछ बांटना,उस दिन उसके कार्यों को याद करना,उसके संग बीते पलों को याद करना उन बातों से कुछ सीखना,अपने बच्चों को उनके कार्यो को बता कर बच्चों को उनसे प्रेरणा देना इत्यादि किसी के लिए एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
व्हाट्सएप्प पर स्टेटस लगा देने मात्र से, मिस यु लिख देना कोई श्रद्धांजलि नही होती हैं पुराने दिनों में ये सोशल साइट नही था इसका मतलब वो लोग अपने बड़ो का सम्मान नही करते थे।ऐसा नही हैं वो उस दिन को एक अवसर की तरह मानते थे,एक शोक सभा करते थे ।अक्सर देखने को मिलता है हर एक चीज का आज फेसबुक पर पोस्ट मिल जाता है चाहें वह घर के किसी सदस्य का पुण्यतिथि हो,देश के किसी योद्धा का जन्मदिवस हो या कोई भी चीज हो यह गलत हैं ,किसी को याद करना का तात्पर्य मन से होता है न की फ़ोटो लगाने से समाज के लोगों को इसके प्रति अपनी दृष्टिकोण बदलनी पड़ेगी।

अविनाश सिंह
801017450

128:-आलेख।

घर परिवार में दीपक के समान होते है पिता:-अविनाश सिंह।

बचपन में सुना था *जब पिताजी का हो साथ तो फिर डरने की क्या बात* उस वक़्त तो यह एक कहावत सा लगता था किन्तु जैसे जैसे मैं बड़ा हुआ यह मेरे जीवन में एक दम सही साबित हुआ।यदि पिताजी का आपके ऊपर आशीर्वाद है तो आप जीवन में कभी भी निराश नही हो सकते हैं एक पिता अपने बच्चों के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर देते हैं उनके ऊपर अनेक जिम्मेदारियां होती हैं परिवार से लगाए, घर,खेती,शादी विवाह आदि का, फिर भी वह कभी नही थकते अपनी आँखों में अपने बच्चों के भविष्य के लिए वह सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करते हैं।
पिता का घर में होना ही बहुत बड़ी चीज हैं परिवार और बच्चों का अस्तित्व पिता में होता हैं। बात करूँ मैं स्वयं अपने पिता जी की तो पेशे से सरकारी कर्मचारी है,किन्तु आज तक उन्हें मैं किसी भी चीज का शौक नही पालते देखा,हमेशा से घर के लिये,बच्चों के भविष्य के लिए ही सोचते है। पिता ही घर की नीव हैं वही मंदिर है वही भगवान है वही मस्जिद हैं।
किन्तु आज समाज में बहुत परिवर्तन हो गया हैं आज के समाज के बच्चें अपने परिवार के सदस्यों से न जाने क्यों दूरी बना रहे हैं यह गलत है यदि आपको कोई दिक्कत है या परेशानी तो आप अपने पिता से खुल कर बोलिये वह आपके सच्चे मित्र समान है जिनके पास हर समस्या के ताले की चाबी होती हैं। पिता घर परिवार में एक दीपक के समान होते हैं जैसे दीपक स्वयं जलकर रोशनी देती है उसकी प्रकार पिता जी परिवार के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं ताकि उनकी संतान खुशी से जीवन व्यतीत कर सके।
मैं अविनाश सिंह एक कवि होने के नाते पिताजी के समपर्ण को देखते हुए उन्हें चार पंक्ति समर्पित करता हूं-पुराने कपड़े में उन्हें अक्सर देखा,नही किसी चीज की चाहत देखा,जब भी मैं उनके दिल में झांका,बच्चों के भविष्य की चिंता देखा।कभी कभी आपके विचार आपके बड़ो से नही मेल खाते हैं किन्तु आप उनकी बातों को अनदेखा नही कीजिये आप उनके द्वारा बताये रास्ते पर चलिए निश्चित राह में कांटे मिलेंगे किन्तु एक दिन आपको सफलता जरूर मिलेगी यह मेरा खुद का अनुभव है।

अविनाश सिंह
8010017450

127:-आलेख।

माता पिता से बड़ा जीवन में कोई भी धन नही:- अविनाश सिंह।

बच्चों के जन्म से लेकर उनके बड़े होने तक उनके परवरिश में माता पिता के योगदान को न कभी चुकाया जा सकता, ना खरीदा जा सकता और ना ही उसका कोई मोल है। माता और पिता यह शब्द ही इतना अनमोल हैं जिसकी कल्पना भी नही की जा सकती। यह देह रूप में हमारे सामने भगवान के रूप में विराजमान हैं बस जरूरत हैं हमें देखने की।
माँ-बाप एक घर की नींव है जिसके सहारे बच्चें आगे बढ़ते हैं,माता पिता बच्चों की खुशी के लिए स्वयं के जीवन को न्योछावर कर देते हैं। बच्चें भले कितने ही बड़े क्यों न हो जाए किन्तु माँ बाप के नजरों में हमेशा बच्चें ही रहते हैं।
एक बच्चा जो कुछ भी सीखता हैं,जीवन में जो कुछ भी हासिल करता हैं उसके जीवन को सींचने का कार्य उसके माता पिता करते हैं।
वह सौभाग्य वाले होते हैं जिनके ऊपर माता-पिता का साया होता है। परिवार में माँ ज्योति है तो पिता प्रकाश है,माँ गीता है तो पिता कुरान। हम जैसे-जैसे बड़े होते है वैसे ही माता पिता के उम्र में गिरावट आती हैं, हम शरीर से मजबूत होते तो वह कमजोर होते हैं। हम जीवन में सब कुछ खरीद सकते हैं किन्तु माता पिता के अदृश्य प्रेम-भाव को कभी नही खरीद सकते हैं। माता पिता अपने बच्चों से कोई ख्वाइश नही रखते हैं सिर्फ उनके बच्चे आगे बढ़े यही कामना करते हैं।
किन्तु आज समाज में परिवर्तन आ रहा हैं बच्चें अपने कर्तव्यों से पीछे हट रहे हैं माँ पिता जी के दिए गए समर्पण को भूल रहे हैं उनके बुढ़ापे की लाठी बनने की बजाय उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ आ रहे हैं जो की गलत हैं, यदि आप उनके पैर नही दबा सकते हैं तो उनके गले को मत दबाइये। माता पिता और बच्चों के विचारों में मदभेद हो जाते हैं किन्तु कभी भी माता पिता से दूरी नही बनाना चाहिए,उन्होंने आपको इस धरती पर लाया हैं,जीवन दिया हैं,इससे बड़ा और क्या दे सकते हैं वह आपको।
मैं *अविनाश सिंह* स्वयं एक कवि होने के नाते कई बार अपने जीवन काल में ऐसी घटना देखता हूँ जब माँ या पिता वृद्ध अवस्था में रोड पर भीख मांगने को मजबूर हो जाते हैं तब मन बहुत द्रवित हो उठता हैं और ऐसे लेख को लिखने के लिए मैं विवश हो जाता हूँ, हमें जीवन में माता पिता का साथ कभी भी किसी भी हाल में नही छोड़ना चाहिए और इस बात का अवश्य ध्यान देना चाहिए की बड़े होकर हम भी एक माता पिता बनेंगे।

अविनाश सिंह
8010017450

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235:-कविता

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