Tuesday, July 7, 2020

12:-हास्य कविता


मैं करेले जैसा कड़वा सा,तुम गोभी के जैसी स्वीट सी,
मैं भिंडी के जैसे बेशवाद सा,तम्हे पनीर की टेस्ट प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं मोदी योगी सा कम्युनल,तुम जयललिता की शान सी,
मैं माल गाड़ी के डिब्बे सा तुम राजधानी की ट्रेन प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय, असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं गाँव की सड़कों सा,तुम शहर की नॉनस्टॉप एक्सप्रेस्वे सी,
मैं कुर्ता पैजामा के दीवाने सा,तुम्हे लिवाइस की जीन्स प्रिय
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं मंगल के बाजार सा,तुम नेहरू प्लेस जैसे चकाचोंध सी,
मैं जनरल के डिब्बो सा,तुम्हे एसी कोच के सीट प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं नोकिया ब्लैकन वाइट सा,तुम ईफ़ोन के कलरफुल सी,
मैं लतामंगेशकर के गाने सा,तुम हनी सिंह की दीवानी प्रिय
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं नोएडा के आलू पराठे सा,तुम जीआईपी माल के बर्गर सी,
मैं दर्री के जैसा कठोर सा,तुम्हे स्लीपवैल के जैसे गद्दे प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं गाँव के देशी लड़कों सा,तुम शहर के कटरीना कैफ सी,
मैं मोबाइल पे डांस करने सा,तुम्हे हौज़ खाज़ का बार प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं टेलीनॉर के 2जी नेटवर्क सा,तुम ऐयरटेल के 4जी डोंगल सी,
मैं हनुमान के भक्त सा,तुम सलमान खान की दीवानी प्रिय,
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

मैं नैनो की रफ्तार सा,तुम ऑडी की कार सी,
मै सिनेमा के दीवाने सा,तुम्हे वेवसिटी के पीवियार प्रिय
असंभव है अपना मेल प्रिय,असम्भव है अपना मेल प्रिय।

अविनाश सिंह
8010017450

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