चाहा जिसे दिल से उसनें विश्वाशघात किया,
सामने से हमे प्यार किया पीछे से वार किया।
अपने गुनाहों को कुबूल कर बैठे है हम,
इश्क़ में इस कदर मशगूल हो बैठे है हम,
उनकी मोह्हबत में न जाने कैसा जादू है,
देख उन्हें सारे-दुख दर्द भूल बैठे है हम।
अब लबों पे बस उनका ही नाम रहता है,
याद कर उन्हें सारे मिसरे भूल बैठे हैं हम।
कैसे बया करे अपने इश्क़ के इस हाल को,
मिलने तो गए पर पता ही भूल बैठे हैं हम।
यादो के हर पल मैं उन्हें ही संजोया है हमने,
इश्क़ तो कर बैठे पर बताना ही भूल बैठे हैं हम।
अविनाश सिंह
8010017450
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