ये दिल तो बहुत कुछ कहता है,
उसके लिए ही हर पल रहता है।
ना जाने क्यों बातो को छुपता है,
देख उसे यू चुप सा हो जाता है।
कह नही पाता कोई सा भी बात,
सह लेता है हर वो एक जज्बात।
उसकी मजबूरी को भी समझता,
इसलिए तो कुछ भी नही कहता
कब तक खुद को युही समझाये,
खुद को ही गलत हर बार बनाये।
ना चाहो फिर भी वही याद आये,
फिर देख उसे दिल क्यो घबराये।
ये दिल तो बहुत कुछ कहता है,
कभी हँसता तो कभी रोता भी है
अविनाश सिंह
8010017450
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