आज बात खत्म हो रहा
कल साथ खत्म हो जाएगा
युही बेवजह जगते-जगते
ये रात भी खत्म हो जायेगा।
वो किये वादे खत्म हो रहे
जो दिए वादे खत्म हो रहे
जो हँसते थे बातों को सुन के
वो आज किनारा कस रहे है।
जिसके लिए हमने दुआ माँगा
वो हमे अब बददुआ दे रहे है
खुद को सही साबित करने मे
वो रात की नींद को बेच रहे।
जिसे चाहा था हमने दिल से
वो हमसे दूर होते जा रहे है
कैसे रोके उन्हें हम जाने से वो
नफ़रत की बीज बोते जा रहे।
सच बोलता हूं न मैं इसलिए
हर वक़्त बदनाम हो जाता हूं
अच्छा करने की चाहत में मैं
सौ बात बर्दाश कर जाता हूं।
दिल मे छुपी दर्द की बात को
कैसे बया करू मैं जज्बात को
दर्द में भी हँसना मै सिख रहा
खामोश रहना मैं अब सिख रहा।
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