Thursday, July 9, 2020

119:-क्षणिकाएंं

आँचल में छिपाई
समाज से बचाई
फिर न जाने दरिंदो
ने कैसे खोज लिया 
मिलके रेप किया।

जात मिलाया
गोत्र मिलाया
कुंडली मिलाया
फिर भी क्या भरोसा
हुआ तब भी धोखा।

दिया है दहेज
दिया है बेटी
बेच घर की खेती
हाथ जोड़े बार बार
रखना बेटी का ख्याल।

कोरोना बीमारी
बन गयी महामारी
नही कोई इलाज
करो परमाणु पे नाज
कोरोना करे विनाश।

हुआ प्रकृति का दोहन
नहीं किया तुमने सहन
प्रकृति करती कमाल
फेंका है कोरोना जाल
फस गए इसके लाल

अविनाश सिंह
8010017450

118:-हाइकु।

निभाना रिश्ते
निःस्वार्थ के भाव से
सच के साथ।

प्यारी दुल्हन
पूछे बड़े भाई से
कब है ब्याह।

नेता भाषण
होते कही कड़वे
गोली बम से।

मिटा दो नाम
करे जो बदनाम
देश महान।।

कोरोना काल
प्रकृति खुशहाल
लोग बेहाल।

गाँव की हवा
नही उसमें धुँआ
दे सुख चैन।

बेटी सा धन
फिर भी लोग बेचे
लोग खरीदे।

बाग बगीचे
हुए रंग बिरंगे
मन को भाए।

स्वर्ग नरक
जीवन के दो द्वार
स्वयं से चुनों।

वक़्त की मार
झेलते मजदूर
है बेकसूर।

अविनाश सिंह
8010017450

117:-बीबी की मनमानी।

बीबी करती है मन मानी
नही बनाती है खानापानी।

कहती है की घूमने ले चलो
पार्क की सैर कराने ले चलो।

कैसे उसे अब समझाऊ मैं
कोरोना का डर दिखाऊ मैं।

कहती नई साड़ी दिलाओ
मैचिंग की मास्क ले आओ।

करती घर में वो है मनमानी
नही बनाती है खाना पानी।

उसे नही किसी का भी डर है
न कोरोना का कोई भय है।

उसे तो चाहिए शॉपिंग करना
कॉस्मेटिक्स का है ढेर करना।

बहुत बड़ी घर में विपदा आयी
बीबी आज ही  जिद पर आई।

कहती कोरोना से नही मैं डरती
जैसे तुमपे बेलन से वार करती।

वैसे ही कोरोना भी मैं लड़ लुंगी
उसे भी मैं घर से बाहर कर दूंगी।

बहुत बड़ी आयी घर में परेशानी
बीबी करती घर में ही मनमानी।

अविनाश सिंह
8010017450

116:-पिता को समर्पित।

सर पर उनका हाथ रहता है
जीवन तभी सार्थक होता है

पिता से बहुत कुछ सीखा है
हर जिद्द  उनसे ही किया है

कभी नही किये  है मना वो
हर एक खुशी दी है उन्होंने

बचपन में उनका पकड़ा था
अभी बहुत कुछ सिख रहा

खुद नही पहनते नए कपड़े
हमें खरीदते है  नए  कपड़े

हर वक़्त उन्हें परेशान देखा
कभी न हँसते मैं उन्हें देखा

इतनी जिम्मेदारी को लेते है
कभी नहीवो थकते हारते है

मेरी खुशी में ही खुशी देखते
नही कोई शौख   है पालते

मेरा जीवन खुशियों से भरे
यही  हमेशा कामना करते।

अविनाश सिंह।
8010017450

115:-पिता के लिए पंक्ति।

पुराने कपड़े में उन्हें अक्सर देखा
नही किसी चीज की चाहत देखा
जब भी मैं  उनके दिल में झांका
बच्चों के भविष्य की चिंता देखा।

कभी नही कुछ  हमें कमी किया
खुद से ज्यादा हमें खुशियां दिया
अपने ऊपर दुख  को झेल लिया
मेरी झोली खुशियों से भर दिया।

हर डाँट में मुझे आशीर्वाद मिला
हर प्यार से जीवन में  राह मिला
बड़े ही नसीब वाले होते वो लोग
जिन्हें पिता जी का  साथ मिला।

उंगली पकड़ के चलना सीखा था
हाथ पकड़ के आगे बढ़ना सीखा
अब तो उनकी बातों को याद कर
मैं  जिंदगी में सफल होना सीखा।

वह इंसान नही है वह भगवान है
पितृ रूप धरती पे  विराजमान है
ये तो देखने मात्र का  नजरिया है
मेरे लिए हर देवों से वो महान है।

गिरा तो उंगली पकड़  के चलाया
ठोकर लगा तब  मुझे है समझाया
यह ऊपर  वाले का रहम है मुझपे
मैं जो भी है उन्होंने ही तो दिलाया

अविनाश सिंह।
8010017450

114:-राज की बात।

आओ  बच्चों तुम्हें  कुछ  बात बताऊँ
जीवन  में आगे  बढ़ने के राज बताऊँ

अपने से बड़ो का  तुम करना सम्मान
तभी  कहे जाओगे  तुम  सबसे महान

माँ  पिता जी के बातों को तुम मानना
उनके दिखाए हुए पथ पर तुम चलना

नही  कभी भी  तुम उनसे जिद्द करना
नही कभी बातों की  अवहेलना करना

कुछ ऐसा करों  की उनका भी नाम हो
नही कभी भी वह कही भी बदनाम हो

उनके  आदर्शों का  तुम पालन  करना
बुढ़ापे में उनके लाठी का सहारा बनना

कभी हो जाए गलती जाने अनजाने में
तो चरण स्पर्श कर के माफी मांग लेना

नही कभी भी उनसे तुम जुबान लड़ाना
ना ही आँख से आंख मिला बात करना

जीवन में माँ बाप  मिलते बड़े नसीब से
बिन माँ के बेटों को रोते देखा करीब से

आओ प्यारे बच्चों तुम्हें यह बात बताऊँ
जीवन में आगे बढ़ने का ये राज बताऊँ

अविनाश सिंह
8010017450

113:-पति पत्नी संवाद।

पति के संग हुआ बीवी का बवाल
बीबी ने दाग दिए  अनेको सवाल

करते नही  हो  तुम एक भी  काम
लगे रहते हो फ़ोन में सुबह से शाम

ऐसी क्या आफत आयी है फ़ोन में
जो लगे रहते तुम फ़ोन से सोने में

पति बेचारा शांत हो धीरे  से बोला
तुम्हारे पापा संग मैं पब्जी है खेला

बीवी को ये सुन और  गुस्सा आया
बिन कहे पति की और दौड़ लगाया

नही बनाऊंगी खाना देख लेना तुम
भूखे ही सो जाओगे  सुन लेना तुम

बेचारे पति को लगा डर लगा मनाने
शॉपिंग का लालच दे लगा बहलाने

बिन परमिशन नही  उठाऊंगा फ़ोन
कोई लड़े या कोई कर ले टेलीफोन

बस तुम्हारी  ही मैं अब बात सुनूंगा
नही किसी केसंग मैं पब्जी खेलूंगा

अविनाश सिंह
8010017450

112:-हाइकु।

सफेद झूठ
काले सच का रंग
से रहो दूर।

डिप्रेशन हो
सबसे बात करो
यही उपाय।

पानी हो शांति 
बैठो परिवार में
करो विचार।

खुद में जीना
घुट घुट मरना
बाते करना।

समस्या बड़ी
हिम्मत नही हारो
उखाड़ फेंको।

खोज लो हल।
समस्या समाधान
दूर व्यधान।

व्यर्थ न कर
जिंदगी अनमोल
रास्ते को खोज।

जीवन त्याग
नही कोई विकल्प
बनो सबल।

हारों या जीतों
नही पड़ता फर्क
आगे को बढ़।

है घोर पाप
आत्मदाह करना
कायर होना।

करो प्रयास
मिलेगी सफलता
न हो उदास।

अविनाश सिंह
8010017450

111:-हाइकु।

जनता माँग
सरकारी आवास
बदहवास।

मोर के पंख
हर धर्म समान
तभी महान।

बढ़े या घटे
नही कोरोना डरे
लोकडॉउन।

कोरोना जंग
हारी है सरकार
व्यर्थ प्रयास।

शांत प्रकृति
दे रही है संदेश
ध्यान से देख।

कोरोना काल
हर लोग बेहाल
प्रकृति मौन।

गरीब जन
तलाशे सुखी रोटी
कच्ची न पक्की।

योद्धा सम्मान
बिकते सरेआम
खरीदे यार।

मास्क पहनो
है कोरोना इलाज
घर में रहो।

ऐसी बीमारी
बनी है महामारी
करे लाचार।

कोरोना नाम
करें चैन हराम
है गुमनाम।

चीन से आया
अजूबा वायरस
देश को खाया।

पाँव के छाले
नही दिखने वाले
खोजे निवाले।

अविनाश सिंह
8010017450

110:-हाइकु।

कृष्ण की बंसी
गोपियां मंत्रमुग्ध
नाचे ठुमुक।

राधे के कृष्ण
बजाते है बाँसुरी
मथुरा खुश।

यशोदा लल्ला
करे माखन चोरी
नंद के गाँव।

गोकुल धाम
कृष्ण का बाल्यकाल
रमण रेती।

गोपियां रूठी
बंसी के तान सुन
करे विलाप।

प्रेम का स्थल
वृंदावन नगर
मन विभोर।

कृष्ण के मित्र
सुदामा भद्र भोज
रहे अभिन्न।

ब्रज की होली
गुलाल और फूल
मन प्रफुल्ल।

मिश्री के भोग
बरसाने की राधा
दिल को भाता।

गिरिराज जी
करते परिक्रमा
मिले महिमा।

नंद के लाल
बसे मथुरा धाम
रास रचाये।

स्वर्ग नगरी
मथुरा वृंदावन
करो दर्शन।

जो नही देखा
बरसाना की होली
खाली है झोली।

असली होली
है लट्ठमार होली
मन को भाये।

जो ब्रज आये
खाली हाथ न जाए
प्रेम ले जाए।

फूलों की होली
लड्डू गोपाल संग
मन प्रसन्न।

अविनाश सिंह
8010017450

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