सर पर उनका हाथ रहता है
जीवन तभी सार्थक होता है
पिता से बहुत कुछ सीखा है
हर जिद्द उनसे ही किया है
कभी नही किये है मना वो
हर एक खुशी दी है उन्होंने
बचपन में उनका पकड़ा था
अभी बहुत कुछ सिख रहा
खुद नही पहनते नए कपड़े
हमें खरीदते है नए कपड़े
हर वक़्त उन्हें परेशान देखा
कभी न हँसते मैं उन्हें देखा
इतनी जिम्मेदारी को लेते है
कभी नहीवो थकते हारते है
मेरी खुशी में ही खुशी देखते
नही कोई शौख है पालते
मेरा जीवन खुशियों से भरे
यही हमेशा कामना करते।
अविनाश सिंह।
8010017450
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