Wednesday, October 7, 2020
234:-कविता।
Monday, August 24, 2020
233:-कविता।
माना बेटी जाती ससुराल
होता उसका हाल बेहाल
पर वह नही होती अबला
बन जाती है वो सबला
ससुराल की बनती चिराग
सास की करती है वो सेवा
तो ससुर की बनती है दवा
पूरे घर को भोजन कराती
बच्चों को पेट में है पालती
घर की जिम्मेदारी उठाती
घर का राशन वो चलाती
उसे कितने काम है होते
पर कभी नही वो डरती है
हिम्मत से काम करती वो
उसेअबला कैसे कह दूँ मैं
जिसमें दुर्गा जैसी रूप हो
काली माँ जैसी स्वरूप हो
उसे अबला न कह सकता
उसके ऐसा संसार में कोई
सबला नही है हो सकता।
Sunday, August 16, 2020
232:-हाइकु।
अटल ही रहेंगे
जय अटल।
सरल था स्वभाव
उच्च विचार।
अटल ही रहते
शत्रु काँपते।
शुरू की यात्रा
प्रथम यात्री।
रोड प्रोजेक्ट
जोड़ा गाँव-शहर
मुख्य उद्देश्य।
कोलकाता को
दिल्ली,चेन्नई,मुंबई
संग जोड़ा।
एक सपना
सबका हो विकास
रहे अटल।
दिया साहस
सैनिकों को बढ़ावा
जंग जिताया।
प्रथम मंत्री
दिया हिंदी व्याख्यान
गौरवान्वित।
किया उन्होंने
परमाणु परीक्षण
पोखरण में।
प्रसिद्ध कवि
ग्वालियर के लाल
ओज के कवि।
दिलाया जीत
कारगिल युद्ध में
चटाया धूल।
जहां भी रहे
किया देश का नाम
शान से रहे।
अटल नाम
अटल थे इरादे
काम अटल।
भारत रत्न
पद्म से विभूषित
थे वो अटल।
सफल नेता
पत्रकार व कवि
प्रधानमंत्री।
मृत्यु या हत्या
बिन्दु बिन्दु विचार
प्रमुख कृति।
कुशल नेता
बहुमुखी प्रतिभा
के थे वो धनी।
अविनाश सिंह
8010017450
Sunday, August 9, 2020
231:-घनाक्षरी।
कफम तिरंगे का जो ओढ़े,उन्हें है प्रणाम
देश के लिए ऐसी कुर्बानी होना चाहिये
करके प्रहार घात , शत्रु शीश काट कर
रणबांकुरों की ये कहानी होनी चाहिए
दुश्मनों का छीन शान,देशहित दिए जान
ऐसे वीर योद्धा को सलामी होना चाहिये
काट के गर्दन लाये,पाक को धूल चटायें
देश के लाल की ये कहानी होना चाहिये
तिरंगे मेरी शान हैं , दुश्मनों को मात कर
भगत सिंह वाली जवानी होना चाहिये
करते ना कोई पाप, रहते मन से साफ
राष्ट्र के खातिर स्वाभिमानी होना चाहिये
करें जो एकता भंग, कर दो उसका अंत
गद्दारों की ऐसी मेजबानी होना चाहिये
बढ़ाते है कदम जो ,रुकते ना वीर कभी
मन में सभी के हिंदुस्तानी होना चाहिए
दुश्मनों को चुन चुन,गोलियों से भून भून
झाँसी कीरानी जैसी मर्दानी होना चाहिये
अविनाश सिंह
Saturday, August 8, 2020
230:-पंक्ति।
भले मैं खुद मिट जाऊंगा
पर तुम सबको बचाऊंगा
भले खुद वापस ना आऊँ
पर तुमको वापस लाऊंगा
सावन की मेंहदी फीकी न पड़ी थी
पर जाने तुम अब कहाँ को चले गए
अभी तो नन्ही जान को न देखा था
फिर रूठ कर इतने दूर क्यो चले गए
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
अविनाश सिंह
8010017450
Friday, August 7, 2020
229:-आलेख।
रोड तो हो रहे है चौड़े पर सिकुड़ रही है लोगों की जिंदगी।
यह बात सभी को अच्छे से पता हैं की पेड़ पौधे हमारे जीवन के लिए कितने महत्वपूर्ण होते हैं,हमें यह जीने के लिए ऑक्सीजन देते है खाने के लिए फल फूल, ईंधन के लिए लकड़ी और बहुत से लड़की से निर्मित सामान। और हम उन पेड़ पौधों को क्या देते है क्या कभी किसी ने सोचा? उसके थोड़ा से बड़े होते ही हम स्वार्थी बन जाते है उसमें एक बाल्टी पानी तक नही डालते है,फिर भी पेड़ हमसे कोई शिकायत नही रखते हैं वह हमें नियमित उपयोगी वस्तु देते रहते हैं किन्तु लोगों की इच्छा और लालच इतनी बढ़ गयी है की लोगों ने पेडों की अंधाधुंध कटान शुरू कर दिया हैं।
Monday, August 3, 2020
228:-आलेख।
227:-हाइकु।
दोस्ती दिवस
आता साल में एक
लगे फरेब।
मित्र बनाओ
मन से अपनाओ
साथ निभाओ।
दोस्त हो ऐसा
बिन आंख वो देखे
तुम्हारे आँसू।
मित्र हो ऐसा
न करे भेदभाव
रहे समान।
दोस्ती हो ऐसी
कृष्ण सुदामा जैसी
देखें दुनियां।
सुख या दुःख
हो आंखों के सम्मुख
सच्चा वो मित्र।
सच के साथ
आजीवन चलता
दोस्ती का रिश्ता।
पिता का हाथ
दोस्त का दिया साथ
रहे हमेशा।
धूप में छाव
मुसीबत में साथ
रहते दोस्त।
दोस्त की बात
रहे हमेशा याद
होते है खास।
जो हँसा देता
आँसू को सुखा देता
वही हैं मित्र।
लगाता गले
पढ़े दिल की बात
असली मित्र।
सच्ची मित्रता
दूर करता शूल
बिछाए फूल।
बाँट लो दुःख
खोल दो हर राज
दोस्तों के बीच।
मित्रता होती
सहारा जीवन का
भूल न यारा।
रखना तुम
पवित्रता से रिश्ता
चलेगी दोस्ती।
कैसे हो मित्र
जैसे भी रहे मित्र
मन पवित्र।
रहे जो साथ
पर्वत सा अडिग
वही है मित्र।
बीते जो पल
बचपन की याद
कैसे भुलाऊँ।
भूले न भूले
बचपन की बात
थे दोस्त साथ।
गिरने न दे
कभी झुकने न दे
वो यार दोस्त।
करो झगड़ा
हो जाना फिर साथ
यही है दोस्ती।
दोस्ती का धागा
मोतियों से पिरोना
दिखे सुंदर।
अविनाश सिंह
8010017450
Saturday, August 1, 2020
226:-आलेख।
225:-आलेख।
हाल के पोस्ट
235:-कविता
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