मासूम सी थी वो सबकी दुलारी और घर की प्यारी थी,
छोटी सी उसकी दुनिया थी माँ बाप ही उसकी दुनिया थीं।
उसपे इतना अत्याचार हुआ कैसे उसने सहा होगा,
देख लाडली को कपड़े में माँ का क्या हाल हुआ होगा।
चिल्लाते चिल्लाते खुद को संभाल नही पा रही हैं
ट्विंकल ट्विंकल बोल के वो बेहोश हो जा रही हैं।
फूलों समान जिसे पाला था,आज कुत्ते उसे नोच रहे थे,
देख उसके पार्थिव शरीर को,उसमे न कोई भी अंस बचे थे।
इतनी दरिंदगी करते वो क्या थोड़ा भी वो सहम पाया नही,
ऐसा अत्याचार करते क्या उसका हाथ थोड़ा कपकपया नही।
कपड़े उसके छोटे थे इस उम्र में कैसे उसे साड़ी पहनाती,
तीन साल की लड़की देख उसकी कैसे हवस है जाग जाती।
स्वयं अत्याचार करके इसने निर्दोश को सूली पे चढ़ा दिया,
खुद शान से वो घूम रहा था प्रशासन भी उसे ही बचा लिया।
जब तक कठोर सजा न होगा, ये देश पर एक दाग ही होगा,
मोदीजी का बेटी बचाओ का सपना कभी भी न साकार होगा।
हत्यारों को फाँसी हो, देशहित में ये सजा भी कुछ कम हैं,
कुछ ऐसा नियम बने की रेप का कभी भी न नामो निशान हो।
अविनाश सिंह।
8010017450
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