टूटा जो हाथ
छूटा हुआ जो साथ
देता है दर्द।
सैनिक जंग
घुसपैठी से कम
नेता के संग।
आत्मनिर्भर
उठ जाओ गिर के
बनो सबल।
मित्र बनाओ
दूरियों को मिटाओ
गले लगाओ।
प्रकृति प्रेम
रखे आत्मकेंद्रित
मानव हित।
मजदूर हूं
घर से भी दूर हूं
मजबूर हूं।
चांदनी रात
पिया के संग बात
दिखे जज्बात।
सियासी कुर्सी
भरे पैसे से जर्सी
मरे एससी।
आँखों का तारा
बने बेटा ही न्यारा
बेटी अवारा?
सियासी रोटी
शराब और बोटी
नजरें खोटी।
धर्म की बात
करे जो दिन रात
व्यर्थ हैं बात।
अविनाश सिंह
8010017450
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