Thursday, July 9, 2020

99:-हाइकु।

टूटा जो हाथ
छूटा हुआ जो साथ 
देता है दर्द।

सैनिक जंग
घुसपैठी से कम
नेता के संग।

आत्मनिर्भर
उठ जाओ गिर के
बनो सबल।

मित्र बनाओ
दूरियों को मिटाओ
गले लगाओ।

प्रकृति प्रेम
रखे आत्मकेंद्रित
मानव हित।

मजदूर हूं
घर से भी दूर हूं
मजबूर हूं।

चांदनी रात
पिया के संग बात
दिखे जज्बात।

सियासी कुर्सी
भरे पैसे से जर्सी
मरे एससी।

आँखों का तारा
बने बेटा ही न्यारा
बेटी अवारा?

सियासी रोटी
शराब और बोटी
नजरें खोटी।

धर्म की बात
करे जो दिन रात
व्यर्थ हैं बात।

अविनाश सिंह
8010017450

No comments:

Post a Comment

हाल के पोस्ट

235:-कविता

 जब भी सोया तब खोया हूं अब जग के कुछ  पाना है युही रातों को देखे जो सपने जग कर अब पूरा करना है कैसे आये नींद मुझे अबकी ऊंचे जो मेरे सभी सपने...

जरूर पढ़िए।