जिंदगी में ऐसे दुःखी हुआ न करो
सपनों के टूट जाने से रोया न करो
जो नही मिल पाया उसका क्या गम
जो है पास उसे कभी खोया न करो
सबसे मित्रता का भाव निभाते चलो
काँटो के पौधों कभी बोया न करो
मिलेंगे राह में तुम्हारे कांटे बहुत से
उन काँटो से किनारा किया न करो
रात्रि अंधेरों से लगता होगा डर तुम्हें
ऐसे डर-डर के जीवन जिया न करो
दिलमें छिपे होंगे तुम्हारे बहुत से दर्द
हर दर्द को गैरो से तुम बया न करो
होंगे विष रूपी अमृत पीने को बहुत
बिन समझे अमृत को पिया न करो
है जिंदगी में बहुत से प्रश्न अविनाश
हर प्रश्नों का उत्तर तुम दिया न करो
अविनाश सिंह
8010017450
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