कोरोना जंग
मजदूर के संग
जीवन भंग।
प्रेम-विलाप
जीवन के दो राह
करे मिलाप।
आत्म निर्भर
करे मार्ग प्रशस्त
प्रमुख अस्त्र।
बीते जो पल
परिवार के संग
रंग बिरंग।
प्रेम की डोर
बांधे जो हर ओर
करें विभोर।
देश के नाम
कर दो ऐसा काम
मिले सम्मान।
लॉक डाउन
मानसिक विषाद
करे आघात।
मजदूर हूं
घर से भी दूर हूं
मजबूर हूं।
टूटा जो हाथ
छूटा हुआ जो साथ
देता है दर्द।
चांदनी रात
पिया के संग बात
दिखे जज्बात।
सियासी कुर्सी
भरे पैसे से जर्सी
मरे एससी।
आँखों का तारा
बने बेटा ही न्यारा
बेटी अवारा?
सियासी रोटी
शराब और बोटी
नजरें खोटी।
धर्म की बात
करे जो दिन रात
व्यर्थ हैं बात।
तेरा दिनों हो
और मेरे बिन हो
है असंभव।
देश हैरान
नेता हैं परेशान
बने महान।
कोरोना आया
प्रदूषण भगाया
सभ्य बनाया।
मास्क पहनों
दूरियों को बना लो
हाथों को धो लो।
घर की नींव
सन्तान के समीप
जीवन द्वीप।
गर्भ में पाली
दिया हमें उजाला
बनी निवाला।
खुली हवा हैं
स्वच्छ वातावरण
नीला पुष्कर।
माँ की ममता
देती हमें समता
दे विनम्रता।
अविनाश सिंह
8010017450
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