Thursday, July 9, 2020

92:-शराब की दुकान।

ऐसी  क्या मजबूरी आ गयी सामनें
जो  खोलनी पड़ी शराब की दुकानें 
उड़ा सोशल डिस्टनसिंग का मज़ाक
आम जनता,पुलिस हो गयी अवाक

लष्मण रेखा का नही हुआ हैं पालन
थक गयी  पुलिस शांत रही प्रशासन
इसे  पागलपन कहूं या कहूं मजबूरी
जो नही रही अब एक मीटर की दूरी 

भूख से बड़ी बन गयी देश की  प्यास
निकले घरसे करने बोतल की तलाश
ऐसा गलत निर्णय ही क्यों लिया गया
ऐश करने के लिये ये क्यों किया गया

लगता हैं मुझे यह एक राजनीति चाल 
गरीबों को बचाने  का यह राह कमाल 
एक बार महिलाओं के बारे  में सोचते
पीके शराब घर के कुत्ते ही उन्हें नोचते

अर्थव्यवस्था  का नया बहाना आ गया
शांति को भंग कर ये दिखावा आ गया
कैसे कहूं की यह कदम एक सार्थक हैं
महामारी में ये उठाया कदम निरर्थकहैं

गरीबों को रोक घर जाने से  पीटा गया
बीच राह में खड़ा कर उन्हें घसीटा गया
जब सभी को घर के अंदर ही रहना था
तो फिर यह हरक़त की  क्योंं करना था

शराब की दुकान खोल किया शांति भंग
भर दिया है देश में मानसिकता का जंग
जब देश में मजदूर हो रहे थे भूख से तंग
तब  मना रहे हैं लोग ज़श्न शराब के संग।

अभी हैं समय इस निर्णय को वापस लो
भले हुई हैं गलती इसे अब तो सुधार लो
सही दिशा में कार्य कर  देश को बचाओ
कोरोना से  लड़कर जंग देश से भगाओ।

अविनाश सिंह
8010017450

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