घड़ी की चाल में
रोटी की थाल में
माँ नज़र आती है
दीवारों की ईंट में
घरों की नींव में
माँ नज़र आती है
ताले की कुंजी में
चाबी के छल्ले में
माँ नज़र आती है
पूजा की थाल में
घर के समान में
माँ नज़र आती है
बर्तनों के ढेर में
रात के अंधेर में
माँ नज़र आती है
चाय की प्याली में
खाने की थाली में
माँ नज़र आती है
भोर के उजाले में
खाने के निवाले में
माँ नज़र आती है।
खाने के स्वाद में
घंटी की आवाज़ में
माँ नज़र आती है
अविनाश सिंह
8010017450
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