Thursday, July 9, 2020

89:-ग़रीब मजदूर।

रोटी दाल की ताकत से
करते यह दिनभर काम
नही नसीब होता  इन्हें
किशमिश और बादाम।

मजदूरी में हैं नही होता
पेंशन का कोई इन्तेजाम
जितना जलाते खून को
उससे कम मिलता ईनाम।

उसे तो पता नही होगा
आज हैं मजदूर दिवस
आज भी रोजगार खातिर
आज भी होगा विवश।

हर काम जो हैं कठिन
करता उसे यह आसान
नाले की सफाई करके
देता स्वच्छता अभियान।

मौसम का फर्क नही
नही धूप की परवाह
चंद पैसों के खातिर
करता जोखिम कार्य।

इमारत के निर्माण में
नही होता उसका नाम
हर एक दीवार में होता
उसके खून का निशान।

मजदूर लेबर कहके
करते उन्हें हम सलाम
नारी भी करती काम
मिलता कम इनाम।

काम का समय फिक्स नही
पगार मेरा होता हैं फिक्स
हर इंसान और हर व्यक्ति
निकालता अपना रीझ।

घर की नींव के समान हैं
नही कोई इसे अभिमान
जैसे नींव उठाता भार को
वैसे सहता यह भी अपमान।

मजदूरी कर कमाया हमनें 
खेती कर उगाया हमने 
खून पसीना बहाया हमनें
नाम देश का बढ़ाया हमनें।

अविनाश सिंह
8010017450

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