एक डर अब सताने लगा है
उसके दूर जाने का समय अब आने लगा है
कैसे समय बीत गया मुझे अंदेशा ही न हुआ
ये सोच मेरी रातों की नींदों को उड़ाने लगा है
उसके दूर जाने का समय अब आने लगा हैं
एक डर अब सताने लगा है
हम लड़ते थे झगड़ते थे फिर भी साथ रहते
अपनी हर बातों को आपस में हैं साझा करते
बचनपन से एक दूसरे का हम सहारा बनते थे
अब वह बात वह साथ टूटने सा लगने लगा है
अविनाश सिंह
8010017450
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