Thursday, July 9, 2020

81:-टूटी साइकल।

हां,मेरी टूटी साईकल अच्छी थी
जो मुझपर बहुत ही जचती थी।

जैसे उसपे अपना हक़ होता था
उससे चलने का सौख होता था।

अब न मिलती है वो खुशी कभी
न देती है वह सुख बाइक कभी।

जो उसे चलाने में बात होती थी
दुनिया तो मानो मुट्ठी में होती थी

भले वो पुरानी थी पर साथ रही
टूटी थी पर हमेशा यादगार रही।

उसपे बैठ कर जो खुशी मिलती
अब बाइक पर कभी न दिखती।

हां,मेरी टूटी साईकल अच्छी थी
जो मुझपर बहुत ही जचती थी।

उसको साफ करने का था क्रेज 
बाइक से नही होती कोई इमेज।

रोज उसे धुलना, निहारना होता
हर मंजिल उसके करीब है होता

हवा निकलने पर दुख भले रहता
पर झट से पंप से हवा भर लेता।

अविनाश सिंह
8010017450

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