हो गए थे स्वतंत्र हम अंग्रेजों की जाल से
पर आज भी दबे हैं गरीबी के बुरे हाल से
इसे देश की आजादी कहूँ या कहूँ गुलामी
जो छोड़ रहे बेटी को कोठे की मकान पे।
जहाँ रोड पर गरीब माँ भीख हैं मांग रही
चंद पैसे खातिर जान को कुर्बान कर रही
जहाँ हिन्दू मुस्लिम में देश ही बँट गया हो
उस देश को स्वतंत्र होने का नाम कैसे दू।
जिस देश में गरीबी से किसान है मर रहा
दहेज के खातिर बाप घर को हैं बेच रहा
उस देश के स्वतंत्रता के बारे में क्या लिखूं
मर रहे हैं फौजी अब भी और मैं क्या कहूँ।
आजादी के 71 वर्ष बाद भी आजाद नही
उच्च~ नीच का भेदभाव आज भी है वही
आजदी के इस पर्दे से हमें अब उठना हैं
नव भारत का निर्माण हमे अब करना हैं।।
अविनाश सिंह
8010017450
No comments:
Post a Comment