बताओं कैसे मनाऊ मैं होली अबकी बार
जहाँ खो दिया हैं देश ने कई माथे का श्रृंगार,
सुना था होली तो रंग और गुलाल की होती है
पर होली तो बन गयी अब खून का त्योहार।
सुना था मैंने बचपन में पापा से एक बात
होली पर हम मिलाते है दुश्मनों से भी हाथ
फिर पुलवामा का अटैक क्यो इस देश पर हुआ
क्या बिगाड़ा था हमने जो ऐसा नरसंहार हुआ।
किसी ने बाप खोया तो किसी ने अपना बेटा
घर उसके इस होली पर भी पसरा होगा सन्नाटा
फिर किस खुशी से मैं मनाऊ होली अबकी बार
जब भारत माँ का सपूत मेरा तिरंगे में है लिपटा।
किसके संग खेलु माँ मैं होली का यह त्योहार
हिन्दू मुस्लिम कर रहे है एक दूसरे पर ही वार
सैय्यद,रेहान और रिज़वान जो थे सबसे ख़ास
आज वही कर रहे मुझपे लाठी डंडो से प्रहार।
सीएए एनआरसी ने ले लिया है मासूमों का जान
इसे न्योछावर कहूँ देश पर या कहूँ मैं बलिदान
फिर कैसे मनाऊ मैं इस वर्ष रंगों की यह होली
जहाँ देखा है मैंने खून से सनी दिल्ली की होली।
अविनाश सिंह
8010017450
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