Wednesday, July 8, 2020

53:-समेटना चाहता हूं।

बहुत कुछ बिखरा है जिंदगी में उसे समेटना चाहता हूँ,
तेरे संग बीते हर उस पल को मैं आज लिखना चाहता हूँ।

पलको पे बैठे हर उस याद को,मैं एक अवाज देना चाहता हूँ,
अपनी हर मुलाकात पर मैं एक इतिहास लिखना चाहता हूँ।

तुम्हारी नादानी को मैं अपने आंखों से देखना चाहता हूँ,
सच कहूँ तो मैं तुम्हे  बनाना चाहता हूँ।

मिली हो जबसे तुम तुम्हारे संग कुछ वक्त बिताना चाहता हूँ,
ज्यादा तो नही पर अपने कुछ अपने राज बताना चाहता हूँ।

बहुत कुछ बिखरा है जिंदगी में उसे आज समेटना चाहता हूँ,
तुम्हारे हर एक सपनो को मैं हाकितत में बदलना चाहता हूँ।

तुम कहती हो न कि अब प्यार नही रहा, मैं अपने प्यार को इस कविता के माध्यम से तुम्हे बताना चाहता हूँ।

अपनी दिल के हर एक दर्द को तुम्हारे सामने दिखाना चाहता हूँ,
हर एक बिखरे हुए पलो को आज मैं समेटना चाहता हूँ।

मैं तुममें जीना चाहता हूँ, आज मैं कुछ लिखना चाहता हूँ,
जिंदगी के हर एक पड़ाव पे तुम्हारे संग होना चाहता हूँ।

तुमसे झगड़ा भी करना चाहता हूँ और तुम्हे बेपनाह मोह्हबत भी करना चाहता हूँ,

तुम्हारे संग बीते हर पल को मैं लिखना चाहता हूँ,
बहुत कुछ बिखरा है जिंदगी में उसे समेटना चाहता हूँ।

अविनाश सिंह
8010017450

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