हिंदी से है शान हमारी,हिंदी से है पहचान हमारी,
हम हिन्द देश के वासी है,हिंदी में है जान हमारी।
जो देश बचाया हमने जवानों की बलिदान को देकर,
अब हिंदी को बचाना है इसको इसका सम्मान देकर।
एक राष्ट्र एक धर्म एक भाषा का अब नारा होगा,
राज्य भाषा ही नही अब हिंदी राष्ट्रभाषा भी होगा।
वह हृदय नही पत्थर है जिसमे हिंदी के प्रति प्यार नही,
लेके जन्म इंसान का वो इंसानियत के भी लायक नही।
जिस भाषा में तुमने जन्म लिया, भूल गए वो मातृभाषा,
अंग्रेजी को स्थान देकर धूमिल कर दी सारी अभिलाषा।
क्या कमी है हमारी पावन हिंदी जैसी भाषा में,
अनेको विद्यवानो ने लेख लिखे इसी मातृभाषा मे।
अंगेजी का गुर्गान कर हिंदी का तुमने तिरस्कार किया ,
लेके जन्म हिन्दू धर्म में हिंदी का तुमने अपमान किया।
आज समाज मे बड़ा बुरा हाल हो गया है,
अंग्रेजी का बोलबाला और हिंदी का आज दिवाला हो गया।
अंग्रेजी के शार्टकट सिख के आज तुम पीछे हो गए,
हिंदी भाषा से अनिभिज्ञ तुम सबसे नीचे हो गए।
चार अक्षर अंगेजी का बोल के वो सम्मानित बन गए,
हम हिंदी के विद्यायन होके भी अपमानित हो गए।
न धर्म की भाषा है न किसी जातपात की भाषा है हिंदी,
किन्तु अंग्रेजी तो अंग्रेज़ो की बोले जाने वाली भाषा है।
जन-जन तक पहुँचाना है मातृभाषा के इस ज्ञान को,
अंग्रेजी को ठुकराना है हिंदी को अब अपनाना है।
अविनाश सिंह
8010017450
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