Wednesday, July 8, 2020

38:-मैं जा रहा हूं माँ

आज मैं जा रहा हूँ माँ,
अपनो से दूर दूसरी दुनिया में जा रहा हूँ माँ,
वहाँ अपना कोई यार नही अपना कोई प्यार नही,
आने की इतनी खुशी थी फिर जाने का इतना गम क्यो माँ।

छुट्टियां तो मानो पल भर में बीत गए,
हर एक दिन हँसी खुशी में बीत,
अब जाने का पल आ गया ना माँ,
अपनो से दूर जाने का गम सत्ता रहा है माँ।

वहाँ आपके हाथ की रोटियांको खिलाएगा माँ,
वहाँ कौन सुबह से शाम तक डाट गा माँ।,
मेरी गलतियों पे कौन समझायेगा माँ।

तेरे आँचल में वो सुख कहा से पाऊंगा माँ,
अपने लाडले बड़े भाई का प्यार कहाँ से पाऊंगा माँ,
पापा की डांट कौन सुनायेगा माँ,
अपनो सा प्यार कौन दिखाएगा माँ।

भैया दीदी का प्यार मैं कहाँ से लाऊंगा 
उनके जैसा साथी मैं वहाँ कहाँ से पाउँगा,
आपके काम मे अब हाथ कौन बटाएगा माँ,
आप मेरे बिना कैसे रह पाएंगी माँ।

आपका लाडला बेटा आज जा रहा मैं माँ,
अपने हर गमो को अपने दिल मे छुपा रहा है माँ।
घर की नन्ही सी यादे लेके जा रहा हु माँ,
इन्ही यादो के सहारे मैं अपना समय काट लूँगा माँ।

अविनाश सिंह
8010017450

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