Wednesday, July 8, 2020

34:-सफलता कविता।

सफलता दूर है पर नामुम्किन नही, 
कदम छोटे हो पर रुके नही।

जरूरी नही हर किसी को मुकाम मिल जाये,
सफलता के परचम भी हर कोई फहरा जाए।

मिलेंगे हर राहो पर फूल तो कहीं शूल यहाँ,
न जाने कौन से राह में मंजिल दिख जाए।

मिलेंगी सफलता कुछ प्रयासों के बाद,
होगी खुशी दूगनी इसी मंजिल के साथ।

प्रयास करो,प्रयत्न करो भूल करो,अभ्यास करो,
मिलेगी सफलता  बस थोड़ा तुम विश्वास रखो।

न हारों हिम्मत बस कदम को तुम आगे बढ़ाओ,
लड़खड़ाओ अगर तो अड़िग होके खड़े हो जाओ।

मत भटको अपने पथ से और ना ही तुम घबराओ,
खामियों को दूर कर मंजिल की ओर कदम बढ़ाओ।

अविनाश सिंह
8010017450

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