Wednesday, July 8, 2020

33:-बारिश अब तो आजा

ऐ बारिश अब तो तू आजा,
तपती धरती को शीतल की धारा पहुँचा जा।

माना तू नाराज है हमारे इन कर्मो से,
माफ कर दे इन बेचारो को इनके कुकर्मो से।

मस्त हवा के साथ इस धरती को भीगा दो,
हर जगह हरियाली का ही बिस्तर बिछा दो।

अब तुम्हारे इन्तेजार में धरती भी सुख गयीं है,
तुमसे मिलने को अब वो भी नजरे गड़ाई पड़ी हैं।

बच्चे,बूढ़े सब तुम्हारे आने का राह देख रहे हैं,
कोई प्रसाद कोई हवन तो कोई बली भेट दे रहे है।

मत करो निराश अब तुम जल्दी से आ जाओ,
अपने किसान भाइयों के चहरे पे एक हँसी दिला जाओ।

धान की खेतो में तुम्हारे आने का बेसब्री से इन्तेजार है,
रोपिआ करती औरते भी तुम्हारे आने का गीत गा रही है।

सबको तुम्हारा इंतज़ार है अब न निराश करो,
बच्चों के कागज़ के नांव का थोड़ा तुम खयाल करो।

रूलाया है ,सताया है ,तुम्हे दुख पहुँचाया है हमने,
न जाने कितनों पेड़ो को बेवजह काटा है हमने।

अब अपनी गलती हम स्वीकार लेते है,
खूब पेड़ लगाएंगे हम ये थान लेते है।

माफ़ कर दो हमे अब और न हमे सताओ,
जल्दी से आओ और हमे कूल कूल कर जाओ।

अविनाश सिंह
8010017450

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