Wednesday, July 8, 2020

32:-जज्बात लिखूँ।

अपनी सोच लिखूं, या अपनी जज्बात लिखूं,
तुम्हारे बारे में आज कुछ याद लिखूं।

सोचता हूं मैं तुम्हे जब भी,
तो मेरे दिल मे जो आते है वो अल्फाज लिखूं।

तेरा चेहरा लिखूं या तेरी आवाज लिखूं,
या तुझसे जुड़ी हर वो पुरानी याद लिखूं।

तेरी आंखें लिखूं या तेरी बातें लिखूं, 
या तेरा वो मुस्कुराता हुआ आदाब लिखूं।

मैं बातें तेरी करता हूं जो खुद से,
या खुदा से कि अपनी वो फरियाद लिखू।

ढूँढती रहती है हर वक़्त तुझे ही मेरी नजर,
आखिर क्यों खोई है मेरी नींद वो मोहताज़ लिखूं।

आंखों-आंखों में तो चुरा लिया तूने मेरे दिल को,
तेरी मासूमियत लिखूं या तेर कातिलाना अंदाज लिखू।

जो साथ दिया था तुमने हर पल मेरै,
आज वो मैं सच्चाई लिखूं या वो इतिहास लिखु।

मैं कल लिखु या आज लिखूं, 
संग बीते हुए हर पल की मैं यादे लिखू।

अविनाश सिंह
8010017450

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