Wednesday, July 8, 2020

31:-जिंदगी पाना तो खोना।

सब पाना ही नही कुछ खोना भी है जिंदगी,
बंद मुट्ठी के सपनों को अपना बनाना है जिंदगी।

पत्थरों से ठोकर खाना है जिंदगी ,
उन्हें तोड़कर मार्ग बनाना है जिंदगी।

मां की कोख से लेकर उनकी गोद में आने तक है जिंदगी, 
जो मिला उसमे खुश होना है जिंदगी।

जो ना मिला उसमे दुखी न होना है जिंदगी,
नन्ही-नन्ही बातों को लेकर रुठ जाने तक है जिंदगी।

मां के प्यार से बहल जाने तक है जिंदगी।
हंसना और सबको हँसाने का नाम ही है जिंदगी।

खिलौनों से खेलते-खेलते बड़े हो जाने तक है जिंदगी,
पिता के उंगली पकड़ उनके कंधे पर आने तक है जिंदगी।

छोटी सी जिद्द को लेकर बैठ जाने तक है जिंदगी,
तो पापा के फटकार से लेकर सहम जाने तक है जिंदगी।

यही प्रेम है यही समर्पण है यही है जिंदगी,
जीवन में कदम रख कर पाव बढ़ाने तक है जिंदगी।

किसी के प्यार में अपना सब कुछ लुटाने तक है जिंदगी,
छोटी छोटी बातों पर लड़ के मनाने तक है जिंदगी। 

ना मानने पर तन्हा आंसू बहाने तक है जिंदगी,
फिर धीरे से आँशु पोछ कर खुश हो जाने तक है जिंदगी।

सब पाना ही नही कुछ खोना भी है जिंदगी,
यही प्रेम यही समर्पण यही है जिंदगी।

अविनाश सिंह
8010017450

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