मां मुझसे गलती फिर से हो गई है,
सच को सच और झूठ को झूठ कहने की गलती अब फिर से हो गई है।
अपने से बड़ों को सम्मान देकर,
फिर उनकी बातो से दुखी हो जाने की गलती फिर से हो गई है।
दूसरे के सपनों को पूरा कर,
स्वयं के सपनो को अधूरे में रखने की गलती अब फिर से हो गई है।
गन्दगी भरे इस समाज में स्वयं को मन से साफ रखने की गलती अब फिर से हो गई है।
गलती ना होते हुए भी नतमस्तक होने की गलती अब हो गई है।
अपने को ऊंचा मानने की गलती अब फिर से हो गई है।
अविनाश सिंह
8010017450
No comments:
Post a Comment