क्योंं हमारा रिश्ता इतना अजीब होता हैंं
क्या हम बेटियों का बस यही नसीब होता हैंं।
तेरे कोख से जन्म लेना क्या यही क़सूर होता है
फिर भी हमे बराबर का हक़ क्यो नहीं मिलता है।
जो लड़की हूँ इसलिए मैं ये भेदभाव सहूं,
अपना दुख बता माँ मैं किससे बया करूँ।
जो तुझसे कहूँ माँ तो तू भी तो लड़की है,
सहती है सब कुछ क्योकि मैं तेरी बेटी हूँ।
कौन सा काम मैं घर का करती नही हूँ ,
सुबह शाम तो मैं रोटियाँ ही सेकती रही हूँ।
लड़का-लड़की में न जाने ये भेदभाव क्यो है,
बेटे का सम्मान और बेटी का अपमान क्यो है।
बेटा पैदा हुआ तो जमाना आ गया,
और मैं पैदा हुई तो सन्नाटा छा गया।
मैं बड़ी हुई तो मुझे बिदा कर दिया
चंद पैसों में औरो के हवाले कर दिया।
अविनाश सिंह
8010017450
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