अमीरों में जन्म ले गरीबी तुमने कहा देखा है,
उजड़ते हुए झोपड़ियो को मैंने हर वक़्त देखा है।
वस्त्र नही गरीबो, को शस्त्र की सुरक्षा अमीरों को,
तपती धूप में भी इन्हें अपना खून बेचते देखा है।
तुम्हे बोटी की चाह है इन्हें रोटी की चाह है,
रोड़ पे सोते हुए इन्हें मैंने रातो को देखा है।
कोई हाथ थामे इनका साथ दे ऐसा अब कोई नही,
इनके नाम पे पैसा ऐंठते हजारों नेताओ को देखा है।
सबका साथ मिले इनका जीवन खिले बस यही चाह है,
इसी को साकार करने के ख़ातिर इस कविता को लिखा है।
अविनाश सिंह
8010017450
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