जी हाँ ! अरे चौकिये मत,
अरे मैं सच्ची बात कह रहा हूं
रेप होने के भी फायदे अनेक है
क्या-क्या गिनाऊँ मैं आपको
और क्या-2 बताऊ मैं आपकों
कब और कहाँ से शुरू करूँ मैं
कुछ समझ ही नही आ रहा हैं
एक नही अनेक हैं फायदे इसके
तभी तो हर रोज ही रेप हो रहा
आज यहाँ तो कल वहाँ हो रहा।
मीडिया को नया मुद्दा मिल जाता है
चैनल का टीआरपी भी बढ़ जाता है
बैठे बिठाये सब कुछ दिखने लगता है
बेटी की इज़्ज़त नीलाम होने लगता है।
नेताओं को नया सा टॉपिक मिल जाता
वोट बैंको की राजनीति शुरू हो जाता
जाति धर्म पर मुद्दे फिर गर्म हो जाता है
फिर कल एक बेटी का रेप हो जाता है।
रेप के दरिंदो के हौसले बुलंद होते जाते है
उन्हें भी अच्छा सा वकील मिल ही जाते है
और तारीख पर तारीख का फैसला आता है
फिर बेल पे दरिंदो को आजादी मिल जाता है
लेखक को लिखने का एक नया मुद्दा मिलता है
श्रद्धांजलि सभा का आयोजन भी हो जाता है
कही सर्टिफिकेट कहि मेडल का वितरण होता है
तभी एक बेटी का कल फिर से रेप हो जाता है।
हिन्दू मुस्लिम में वोट बनाना आसान हो जाता है
नेताओं को चैनल पे आने का मौका मिल जाता है
अखबारों की सुर्खिया बनाने में सुविधा हो जाती है
फिर कल एक बेटी जल कर राख में मिल जाती है।
लोगों को अपनी पहचान बनाने का मौका मिलता
कैंडल लेकर फ़ोटो खिंचवाने का सुअवसर मिलता
फेसबुक इंस्टाग्राम परये फ़ोटो अपलोड हो जाते हैं
चंद मिनट में सौ से अधिक लाइक तो आ जाते है।
चार दिन तक पूरा समाज सामाजिक दिखने लगता
सच और गलत की बात सब एक साथ करने लगता
बहु बेटियों के लिए थोड़ी सी इज्जत बन ही जाती है
फिर कहीं कल बेटी इनके ही चंगुल में फस जाती है।
मुझे पता है आप सब को यह पढ़ कर बुरा लग रहा है
और इसका शीर्षक भी आपकों अटपटा सा लग रहा है
किंतु सिर्फ यही सच्चाई है स्वयं से भी पूछिए एक बार
कितने आँसू गिरे,कितने वक़्त आपने भोजन नही किये।
अविनाश सिंह
8010017450
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