सुबह हो या शाम तुझे ना है कोई अराम,
काम का इतना है ध्यान की तुझे अपनों का न है कोई फरमान।
होली हो या दीवाली हो ईद या बकरीद,
तुझे ना है कोई आराम, सुबह में है काम तो रात में है काम।
औरो की सुरक्षा के लिए रातों की नींद को बेच दिया,
अपनों की यादों को हर पल आंखों में सजा लिया।
तुझे न है किसी चीज का सपना न ही मिलता रेमंड का कपड़ा,
मिला तुझे कौन सा सम्मान 1 नौकरी और 5 लाख का ईनाम।
खाने को मिलता है तुझे रूखा-सूखा सा सामान,
सुबह हो या शाम तुझे ना है कोई आराम।
अपनों का प्यार घर पर ही छोड़ दिया,
देश के खुशहाली के लिए अपने को जोखिम में डाल दिया।
दो वक्त की रोटी समय पर खाने को भी नहीं मिलता,
और काम से तुझे कभी फुर्सत भी तो नहीं मिलता।
कौन सा काम तुझसे करवाया नहीं जाता,
कभी गोलियां तो कभी लाशे उठवाया नहीं जाता।
कितना मुश्किल होता है तेरे जिंदगी का सफर,
कभी पहाड़ तो कभी चट्टान होते हैं तेरे जिंदगी का हमसफ़र।
देश चैन से सो सके इसलिए तू रातों को पहरा देता है,
पर बता तेरे घर वालों की रखवाली कौन करता है।
पूरा नहीं होता तेरा कोई सा भी अरमान,
सुबह हो या शाम तुझे ना है कोई आराम।
अविनाश सिंह
8010017450
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