Thursday, July 9, 2020

77:-ममता की छाव।

ममता की छांव है मेरी माँ,
हर दर्द की दुआ है मेरी माँ 
नन्हे कदमों से चलना सीखा,
गिरने पर उठाया जिसनें,
वह है मेरी प्यारी मां।

गलत राहों से रोका हैं जिसने
अपने खुशी को त्यागा जिसनें
सफलता को दिलाया जिसनें
वह है मेरी प्यारी मां।

गलतियों पर समझाने वाली,
सच का मार्ग दिखाने वाली, 
मुझे एक पहचान दिलाने वाली 
वह है मेरी प्यारी माँ।

मेरी खुशियों से खुशी पाने वाली, 
ठोकर लगने से मुझे बचाने वाली
अच्छे संस्कार का पाठ पढ़ाने वाली
वह है मेरी प्यारी माँ।

खुद रूखा-सूखा रोटी खाने वाली
हमें गर्म खाना को खिलाने वाली
हमें सुला कर फिर सोने वाली
वह है हमारी प्यारी माँ।
 
हमें डाँटकर भी हम गले लगाती है, 
सर्द में गर्मी का एहसास दिलाती है 
बीमार पड़ने पर सीने से लगाती है
वह है मेरी प्यारी माँ।

बचपन में हमें लोरियां सुनाती थी
बड़े छोटो का संस्कार सिखाती थी
वह भगवान की मूरत हैं मेरी माँ
वह है मेरी प्यारी माँ।

अविनाश सिंह
8010017450

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