ओ राधा
ओ राधा तू सुन मोरी बतिया
तेरो कृष्ण बड़ो ही नटखट हैं
कबो करे शैतानी हमसे तो
कबो करें मनमानी हमसें
ओ राधा
ओ राधा तू सुन मोरी बतिया
तेरो कृष्ण बड़ो ही नटखट हैं
जब मैं जाऊँ यमुना तट पे
आये ग्वालन संग अपने
नही देखत हमको कबहु
और करें बस तोरी बतिया
ओ राधा
ओ राधा तू सुन मोरी बतिया
तेरो कृष्ण बड़ो ही नटखट हैं
बाँसुरी की मैं हुई दीवानी
सुनतो ही मैं हुई मस्तानी
रातों को सपने में आवत
बिन ओकरे कुछु नही भावत
ओ राधा
ओ राधा तू सुन मोरी बतिया
तेरो कृष्ण बड़ो ही नटखट हैं
बिन देखे मैं रही न पाँऊ
सोचत हूं कइसे गले लगाऊ
रहत ना हमरो पास कबहू
बिन निहारो मैं मर ही जाऊँ
ओ राधा
ओ राधा तू सुन मोरी बतिया
तेरो कृष्ण बड़ो ही नटखट है
ओ राधा
ओ राधा तू सुन मोरी बतिया
तेरो कृष्ण बड़ो ही नटखट हैं
अविनाश सिंह
8010017450
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