Wednesday, July 8, 2020

70:-बाबा साहेब को समर्पित।

बहुत कठिन जब राह थी
तब संविधान का जन्म हुआ
हर कानून व्यवस्था के खातिर
संविधान का तब सृजन हुआ।

माता जिसकी भीमाबाई
पिता थे जिसके सकपाल
आज के दिन ही आया था
भारत माँ का वह लाल।

बिना हिंसा का पाठ किये
गौतम बुद्ध के विचार लिए
बाबा साहेब ने आहूति दी 
इसके निर्माण के खातिर।

रच दिया जो संविधान को
बन गए सबके महान वो
हम सबको गर्व है उनपर
देश का उद्धार हैं उनपर

छाया जिसकी निर्मल थी
गरीबों के वो बने मशीहा
उच्च नीच का भाव नही
जीने का है दिया तरीका।

छुआछूत था जो अभिशाप
नही बड़ा कोई इससे पाप
सेवा की भाव था उनका
अम्बेडकर नाम था उनका।

कहना बड़ा ही आसान है
करना उतना ही कठिन
बिन पढ़े संविधान को
होती सबकी बुद्धि हीन।

हम कहते है तुम सबको
तुम भी लिख दो संविधान
एक अनुच्छेद नही आएगा
दिमाग बस चक्कर खायेगा।

अविनाश सिंह
8010017450

No comments:

Post a Comment

हाल के पोस्ट

235:-कविता

 जब भी सोया तब खोया हूं अब जग के कुछ  पाना है युही रातों को देखे जो सपने जग कर अब पूरा करना है कैसे आये नींद मुझे अबकी ऊंचे जो मेरे सभी सपने...

जरूर पढ़िए।