Wednesday, July 8, 2020

65:-दिल मे बैठाये है।

इस कदर तुम्हें हम दिल में बैठा रखें है,
अपने सपनों में भी तुम्हें हम सजा रखें है
दूर हमें कोई यहाँ से कर भी दे तो क्या गम
तुम्हारे लिए तो चाँद पर भी घर बना रखें है।

सुनो तुम्हें मेरा प्यार क्या समझ नही आता,
रोता हूं मैं क्या रोने का आवाज़ नही आता
तोड़ा है तुमने मेरे दिल के हर एक सपने को
फिर भी मेरा साथ तुम्हें रास क्यो है आता।।

गम है तो क्या हुआ हम फिर भी हँसते नजर आते है
दिल में कुछ राज़ छुपाये हम आगे को निकल जाते है
हा उसने तो तोड़ा था दिल मेरा एक पत्थर समझ कर
हम तो पत्थर कोभी भगवान समझ कर पूजते आते है।

अविनाश सिंह
8010017450

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