Wednesday, July 8, 2020

63:-मैं चाहता हूं।

मैं चाहता हूं देश की ग़रीबी को मिटाना
भूखे को भोजन तो अनाथों को सहारा दिलाना।

मैं चाहता हूं देश की सोच को बदलना 
आत्मीयता, देशप्रेम, लगाव को जीवन में लाना।

मैं चाहता हूं उस माँ को सहारा देंना
जिसके बेटे ने कर दिया है उसे घर से बेगाना।

मैं चाहता हूं उस बेटियों को पढ़ाना
जिसनें देखा नही हो कभी स्कूल का जमाना।

मैं चाहता हूं उस भ्रष्टाचार को मिटाना
सत्य, प्रेम,अहिंसा का पाठ सभी को पढ़ाना।

मैं चाहता हूं सभी धर्मों में प्रेम भावना
हिन्दू, मुस्लिम सब एक हो ऐसी हो सदभावना।

मैं चाहता हूं अहंकार का न हो निवास
प्रेम, व्यवहार से दे सभी एक दूसरे का साथ।

मैं चाहता हूं न हो दहेज जैसी प्रथा
बेटी को माने यही है सबसे बड़ी दहेज व्यवस्था।

मैं चाहता हूं बेरोजगारी को भगा देना
युवा को नौकरी मिले जीवन खुशी से सजा देना।

मैं चाहता हूं हो नव भारत का निर्माण
सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाये का सपना साकार।

अविनाश सिंह
8010017450

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