लो फिर से हो गया एक और अत्याचार
हो गया फिर से एक बेटी संग नरसंहार
कह रहे सब की बदल रहा है मेरा देश
आज फिर से हो गया एक बेटी का रेप।
दिल दहल जा रहा यही सोच कर हर बार
थोड़ा सा जलने पर होता कितना दर्द यार
वह तो जल कर बन गयी थी राख समान
फिर कैसे कहूं बार बार मेरा भारत महान।
बेटी तुमपे आज कितना अत्याचार हुआ है
मानवता शब्द आज फिरसे शर्मशार हुआ है
लो अब फिर से कैंडल जलना शुरू हो गया
और कानून मेरा बिस्तर ताने सोये हुआ है।
कोठे की तवायफ़ आज उसके लिये रो पड़ी
देख शरीर को उसके फिर चीत्कार उठ पड़ी
तू खेल मेरे जिस्म से तुझे जितना है मन करें
मेरे देश की बहू बेटी पर तु बस रहम कर दें।
अविनाश सिंह
8010017450
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