Wednesday, July 8, 2020

50:-अटलजी को समर्पित।

राष्ट्र ने खोया है लाल अटल सा, यह दुख की घड़ी है,
अंतिम दर्शन के लिए मात्र हज़ारो की भीड़ उमड़ी है।

लोगों का दिल जीत कर आज मृत्यु से अमर हो गए,
छोड़ के हम सब का साथ आज इस तिरंगे से लिपट गए।

बुझ गया वो दीपक आज जो था अंधेरे के उज्याले सा,
राष्ट्रहित के लिए अपना सब कुछ छोड़ कर चले गए।

अंतिम समय में भी मौत से लड़ने के अटल तुम्हारे इरादे रहे,
बिन झुकाए झंडे को एक दिन पूर्व, तान कर उसे चले गए।

जो जोड़ दिया था तुमने गांव की सड़कों को शहरों से,
करके सफल परीक्षण पोखरान का सबके दिलों को जीत गए।

आपकी हर लेखनीय का हर वक्त हमपे असर रहेगा,
पकड़ा के कलम हाथों में हम से कोसो दूर क्यों चले गए।

रहेगी हर वक्त अटल नाम हर एक दिलो पे हर एक जुबां पे,
राष्ट्रहित, देशप्रेम, सद्भावना का पाठ पढ़ा कर इतने दूर क्यों चले।

अविनाश सिंह
8010017450

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