Tuesday, July 7, 2020

5:-कविता:-माँ और पिता

माँ ज्योति है तो पिता प्रकाश है,
माँ जीवन है तो पिता आश है।

माँ बांसुरी है तो पिता संगीत है,
माँ सुर है तो पिता भाव गीत है।

माँ गीता है तो पिता कुरान है,
माँ रोटी है तो पिता मकान है।

माँ मंदिर है तो पिता मूर्ति है,
माँ सागर है तो पिता पानी है।

माँ काबा है तो पिता मस्जिद है,
माँ पर्वत है तो पिता पहाड़ है।

माँ सुख है तो पिता समृद्ध है,
माँ अर्ध है तो पिता कुम्भ है।

माँ ईंट है तो पिता घर की नींव है,
माँ पिपल है तो पिता छाँव है।

माँ तो माँ है पिता तो पितृ है,
बिन माँ नही कोई अस्तित्व हैं

अविनाश सिंह
8010017450

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