तेरे शहर में आया हूं एक मुसाफिर की तरह,
तू बना ले मुझे अपना एक साज़िश की तरह,
क्या कहेगा क्या सोचेगा ये जमाना ना सोच तू,
तू लगा ले सीने से आज मुझे एक आशिक़ की तरह।
समा गया है मुझमें तेरे इश्क़ का जादू उस जाम की तरह
जो पीके मदहोश होते है तेरे कातिल एक बदनाम की तरह
ना हट अब पीछे तू इस बात पे की क्या कहेगा ये जमाना
बस बना ले मुझे अपना उस राध-कृष्ण की जोड़ी की तरह।
जो तू कह दे अगर तो चाँद तारे भी तोड़ लाऊंगा,
तेरी खुशी के लिए अपना सब कुछ लुटा आऊंगा,
बस चाह है तेरा हाथ हो और जीवन भर का साथ हो,
मैं खुद को कुर्बान कर दूंगा उस कमल के फूल की तरह।
अविनाश सिंह
8010017450
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