Thursday, July 9, 2020

102:-नफ़रत की बीज।

नफ़रत की बीज बोन लगे
ताश के समान  गिरने लगे 
जिसपे गुलाब के फूल उगे
उसपे बबूल बोने लगे लोग

हक के लिए  लड़ने लगे है
बात-2 पे अड़ने  लगे लोग
जो  हमसे सीखते थे जीना
हमें  ही मारने लगे वो लोग

औकात दिखाने लगे  लोग
बाते बनाने में  लगे है लोग
जिसके हम नें ढके  थे तन 
वही वस्त्र फाड़ने लगे लोग

अविनाश सिंह
8010017450

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