कहते हैं सब विश्वास पर टिकी है दुनिया
क्या है विश्वास इससे अनिभिज्ञ हैं दुनिया
अर्थ का तो पता नही क्या है यह विश्वास
पर खोजते हैं सभी एक दूसरे में कमियां
लाये जो रिश्ते में प्यार जो दे हमें सम्मान
बनाएं आपको सर्वोत्तम दे अलग पहचान
कर देता जो अपनों और गैरों की पहचान
ऐसे ही वीर पुरुष होते हैं समाज में महान
विश्वास वह नही हैं जो हम दूसरे पर करें
विश्वास वह है जो सभी के दुःखों को हरे
आँख बंद कर न करो किसी पर विश्वास
नही तो हो जायेगा तुम्हारा भी सर्वनाश
मोती की पहचान कहाँ माला की है मान
लगे पिरोने में जिसके कई घंटो का काम
जो टूटे तो अक्सर हो जाती हैं वह छोटी
न बन पाती पहले जैसी माला की मोती।
अविनाश सिंह
8010017450
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