हाँ नहीं है मोहब्बत,
अब तुमसे हर रोज कहता हूँ पर सुनो ना
बिन सोचे तुम्हें एक पल भी रह नहीं पाता हूं
संग बीते उन लम्हों को मैं, दूर नहीं कर पाऊंगा
अब नही लगता वो वक़्त मैं वापस लेकर आऊँगा।
हा नहीं है मोहब्बत,
हाथों से तुम्हारा हाथ हमेशा के लिए छूट गया,
जिंदगी जीने का ख्वाब बस ख्वाबो में सिमट गया।
तुम्हारे जाने के बाद सब ख्वाब बन कर रह गया
ये जिंदगी जीना भी एक बोझ सा है बन गया।
हा नहीं है मोहब्बत,
बस आँखे बंद करते ही लगता है तूम पास हो,
सब फीका लगता बस लगता है तुम ख़ास हो।
कोशिश रहता है तुमसे बहुत दूर जाने की,
करता हूं मैं रोज अनेको बहाने बनाने की।
हा नहीं है मोहब्बत,
मासूम सा शर्माता चेहरा जब सामने आ जाता
मेरी आँखें बया कर देती मैं स्वयं को रोक न पाता।
वो वक़्त जब इन हाथों में तुम्हारा हाथ था,
मैं भूल जाता वो भी पल तुम्हारा साथ था।
अविनाश सिंह
8010017450
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